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जॉनसन एंड जॉनसन ने मुआवजा राशि के फार्मूले को दी चुनौती
Updated Thu, 13 Dec 2018 06:35 AM IST
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इंप्लांट से दिव्यांग मरीजों के
मुआवजा फार्मूले को चुनौती
4700 लोगों के मामले में सरकारी निर्देश के खिलाफ जॉनसन एंड जॉनसन हाईकोर्ट में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिकी की बड़ी दवा और प्रसाधन कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने उसके हिप इंप्लांट से दिव्यांग 4700 लोगों को मिलने वाली मुआवजा राशि तय करने के सरकारी फार्मूले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने हरेक व्यक्ति को 30 लाख से लेकर 1.2 करोड़ रुपये तक मुआवजा देने की सिफारिश की थी।
मामला वर्ष 2004 से 2010 के बीच कंपनी के हिप इंप्लांट से दिव्यांग लोगों से जुड़ा है। इस मुद्दे पर 30 नवंबर 2018 को अमर उजाला ने एक्सक्लूसिव खबर छापी थी। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 4700 में से 3100 लोगों की पहचान हो चुकी है। न्यायमूर्ति विभू बाखरू के समक्ष बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कंपनी के वकील ने कहा कि मुआवजा की राशि तय करने का फार्मूला गलत है। इसलिए इसे रद्द किया जाए। इसके अलावा, सरकार को कड़ा कदम न उठाने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि इस तरह मुआवजा देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इस मुद्दे पर डॉ. अरुण अग्रवाल की रिपोर्ट पर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए 26 फरवरी 2019 की तारीख दी है। इस मामले में मरीजों की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने जांच में शिकायतें सही पाईं कि कंपनी के हिप इंप्लांट के कारण हजारों लोग दिव्यांग हो गए है। कमेटी ने यह भी पाया कि इस इंप्लांट से मरीजों के शरीर में जहर फैल रहा है।
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मुआवजा फार्मूले को चुनौती
4700 लोगों के मामले में सरकारी निर्देश के खिलाफ जॉनसन एंड जॉनसन हाईकोर्ट में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिकी की बड़ी दवा और प्रसाधन कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने उसके हिप इंप्लांट से दिव्यांग 4700 लोगों को मिलने वाली मुआवजा राशि तय करने के सरकारी फार्मूले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने हरेक व्यक्ति को 30 लाख से लेकर 1.2 करोड़ रुपये तक मुआवजा देने की सिफारिश की थी।
मामला वर्ष 2004 से 2010 के बीच कंपनी के हिप इंप्लांट से दिव्यांग लोगों से जुड़ा है। इस मुद्दे पर 30 नवंबर 2018 को अमर उजाला ने एक्सक्लूसिव खबर छापी थी। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 4700 में से 3100 लोगों की पहचान हो चुकी है। न्यायमूर्ति विभू बाखरू के समक्ष बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कंपनी के वकील ने कहा कि मुआवजा की राशि तय करने का फार्मूला गलत है। इसलिए इसे रद्द किया जाए। इसके अलावा, सरकार को कड़ा कदम न उठाने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि इस तरह मुआवजा देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
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उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इस मुद्दे पर डॉ. अरुण अग्रवाल की रिपोर्ट पर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए 26 फरवरी 2019 की तारीख दी है। इस मामले में मरीजों की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने जांच में शिकायतें सही पाईं कि कंपनी के हिप इंप्लांट के कारण हजारों लोग दिव्यांग हो गए है। कमेटी ने यह भी पाया कि इस इंप्लांट से मरीजों के शरीर में जहर फैल रहा है।
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