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- रिसाइकल प्लास्टिक में मौजूद होता है रसायन
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:31 PM IST
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खिलौनों के रसायन से रुक
सकता है बच्चे का विकास
- रिसाइकल प्लास्टिक में होता है खतरनाक रसायन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। क्या आपका बच्चा भी खिलौनों को बहुत पसंद करता है। यदि हां तो यह खबर आपके लिए है। एक ताजा शोध में पता चला है कि भारतीय खिलौनों में भी खतरनाक ब्रमॉमिनेटेड डाईऑक्साइन (जहरीले रसायनों का एक समूह) मौजूद होता है। ज्यादातर खिलौने जहरीले रसायनों की मिलावट से निर्मित किए जा रहे हैं, जो आपके बच्चों में कई तरह की विकृतियां पैदा कर सकते हैं।
टॉक्सिक लिंक ने एक वैश्विक शोध संस्था के साथ संयुक्त अध्ययन में यह बात कही है। संस्था का कहना है कि ब्रॉमिनेटेड डाईऑक्साइन खतरनाक रसायनों का ऐसा समूह है, जो बच्चों के विकास, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। रिसाइकल प्लास्टिक का इस्तेमाल खिलौने बनाने में किया जाता है। इसमें कई जहरीले रसायन मिले हैं।
संस्था के एसोसिएट डायरेक्टर सतीश सिन्हा ने बताया कि जांच-परीक्षण के लिए दुनिया के कई देशों से नमूने लिए गए थे। इन सभी नमूनों में खतरनाक रसायन मिले हैं। भारतीय नमूने में भी यह मिले हैं। इसका एक ही उपाय है कि जिस रिसाइकल उत्पाद का इस्तेमाल खिलौने बनाने में किया जाए उसमें डाइऑक्साइन रोकने के लिए पहल की जाए। बच्चों की सेहत के लिए स्वच्छ पर्यावरण बेहद जरूरी है। टॉक्सिक लिंक के कार्यक्रम समन्वयक पीयूष मल्होत्रा ने कहा कि भारत में खिलौनों के निर्माण में रसायनों के प्रयोग की एक सीमा तय होनी चाहिए।
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सकता है बच्चे का विकास
- रिसाइकल प्लास्टिक में होता है खतरनाक रसायन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। क्या आपका बच्चा भी खिलौनों को बहुत पसंद करता है। यदि हां तो यह खबर आपके लिए है। एक ताजा शोध में पता चला है कि भारतीय खिलौनों में भी खतरनाक ब्रमॉमिनेटेड डाईऑक्साइन (जहरीले रसायनों का एक समूह) मौजूद होता है। ज्यादातर खिलौने जहरीले रसायनों की मिलावट से निर्मित किए जा रहे हैं, जो आपके बच्चों में कई तरह की विकृतियां पैदा कर सकते हैं।
टॉक्सिक लिंक ने एक वैश्विक शोध संस्था के साथ संयुक्त अध्ययन में यह बात कही है। संस्था का कहना है कि ब्रॉमिनेटेड डाईऑक्साइन खतरनाक रसायनों का ऐसा समूह है, जो बच्चों के विकास, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। रिसाइकल प्लास्टिक का इस्तेमाल खिलौने बनाने में किया जाता है। इसमें कई जहरीले रसायन मिले हैं।
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संस्था के एसोसिएट डायरेक्टर सतीश सिन्हा ने बताया कि जांच-परीक्षण के लिए दुनिया के कई देशों से नमूने लिए गए थे। इन सभी नमूनों में खतरनाक रसायन मिले हैं। भारतीय नमूने में भी यह मिले हैं। इसका एक ही उपाय है कि जिस रिसाइकल उत्पाद का इस्तेमाल खिलौने बनाने में किया जाए उसमें डाइऑक्साइन रोकने के लिए पहल की जाए। बच्चों की सेहत के लिए स्वच्छ पर्यावरण बेहद जरूरी है। टॉक्सिक लिंक के कार्यक्रम समन्वयक पीयूष मल्होत्रा ने कहा कि भारत में खिलौनों के निर्माण में रसायनों के प्रयोग की एक सीमा तय होनी चाहिए।
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