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उपहार अग्निकांड हादसा
Updated Tue, 04 Dec 2018 09:56 AM IST
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उपहार अग्निकांड हादसा
हाईकोर्ट ने अंसल के पासपोर्ट मामले में सीबीआई से मांगा जवाब
दिल्ली पुलिस को दिया 10 दिन में विजिलेंस जांच पूरी करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उपहार अग्निकांड मामले में पीड़ितों की ओर से दायर आवेदन पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह आवदेन दायर कर मामले में आरोपी रहे सुशील अंसल द्वारा पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए भरे गए आवेदन में केस की जानकारी छिपाने और उसके खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भी पासपोर्ट जारी होने की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।
जस्टिस नजमी वजीरी ने सीबीआई को नोटिस जारी कर 17 दिसंबर तक जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता की पड़ताल के लिए विजिलेंस जांच देरी से शुुरू करने पर फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दस दिन के भीतर यह जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के समक्ष एसोसिएशन आफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) की ओर से दायर आवेदन पर जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि केंद्रीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव की रिपोर्ट में माना गया है कि सुशील अंसल ने 2013 में पासपोर्ट का नवीनीकरण के लिए दिए आवेदन में अपने मुकदमों की जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद भी अंसल का पासपोर्ट बन गया। इससे पासपोर्ट अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और अंसल की मिलीभगत साफ नजर आती है। इसलिए इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
15 को आदेश तो 28 नवंबर को क्यों शुरू किया
दूसरी ओर से दिल्ली पुलिस की ओर से त्रिदीप पायस ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता की पड़ताल के लिए 28 नवंबर को विजिलेंस जांच शुरु की जा चुकी है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि जब कोर्ट ने 15 नवंबर को आदेश दिया था तो जांच 28 नवंबर को शुरु क्यों की गई। कोर्ट के समक्ष सुशील अंसल की ओर से जिरह करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जौन ने कहा कि उपहार हादसा जून 1997 में हुआ था। उनके मुव्वकिल को 1996 में 20 साल की अवधि के लिए पासपोर्ट जारी किया जा चुका था। इसके बाद 2000 व 2004 में केवल अतिरिक्त पन्नों के लिए आवेदन किया गया था। इसलिए इसकी पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हुई थी क्योंकि इसकी जरूरत नहीं थी।
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हाईकोर्ट ने अंसल के पासपोर्ट मामले में सीबीआई से मांगा जवाब
दिल्ली पुलिस को दिया 10 दिन में विजिलेंस जांच पूरी करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उपहार अग्निकांड मामले में पीड़ितों की ओर से दायर आवेदन पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह आवदेन दायर कर मामले में आरोपी रहे सुशील अंसल द्वारा पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए भरे गए आवेदन में केस की जानकारी छिपाने और उसके खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भी पासपोर्ट जारी होने की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।
जस्टिस नजमी वजीरी ने सीबीआई को नोटिस जारी कर 17 दिसंबर तक जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता की पड़ताल के लिए विजिलेंस जांच देरी से शुुरू करने पर फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दस दिन के भीतर यह जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के समक्ष एसोसिएशन आफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) की ओर से दायर आवेदन पर जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि केंद्रीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव की रिपोर्ट में माना गया है कि सुशील अंसल ने 2013 में पासपोर्ट का नवीनीकरण के लिए दिए आवेदन में अपने मुकदमों की जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद भी अंसल का पासपोर्ट बन गया। इससे पासपोर्ट अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और अंसल की मिलीभगत साफ नजर आती है। इसलिए इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
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15 को आदेश तो 28 नवंबर को क्यों शुरू किया
दूसरी ओर से दिल्ली पुलिस की ओर से त्रिदीप पायस ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की संलिप्तता की पड़ताल के लिए 28 नवंबर को विजिलेंस जांच शुरु की जा चुकी है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि जब कोर्ट ने 15 नवंबर को आदेश दिया था तो जांच 28 नवंबर को शुरु क्यों की गई। कोर्ट के समक्ष सुशील अंसल की ओर से जिरह करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जौन ने कहा कि उपहार हादसा जून 1997 में हुआ था। उनके मुव्वकिल को 1996 में 20 साल की अवधि के लिए पासपोर्ट जारी किया जा चुका था। इसके बाद 2000 व 2004 में केवल अतिरिक्त पन्नों के लिए आवेदन किया गया था। इसलिए इसकी पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हुई थी क्योंकि इसकी जरूरत नहीं थी।
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