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आरएमएल अस्पताल में आयुष्मान भारत के तहत पहली प्लास्टिक सर्जरी
Updated Sun, 02 Dec 2018 06:55 AM IST
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आरएमएल अस्पताल में आयुष्मान भारत
के तहत हुई पहली प्लास्टिक सर्जरी
- छह-सात साल पहले जलने से युवती के गाल पर बन गया था निशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आरएमएल अस्पताल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के तहत दिल्ली की पहली प्लास्टिक सर्जरी करने का दावा किया है। यह आपरेशन उत्तर प्रदेश की 22 वर्षीय एक युवती का किया गया है। मरीज को बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. वीके तिवारी के अनुसार, उनके पास इस सप्ताह के शुरुआत में उत्तर प्रदेश से एक युवती आई। करीब छह-सात साल पहले आग से जलने की वजह से उसके दाएं गाल पर निशान बन गया था। जिससे वह काफी परेशान थी। उन्होंने बताया कि इसके लिए टिश्यू एक्सपेंडर तकनीक का सहारा लिया गया है। युवती को जल्द ही छुट्टी दे दी जाएगी। फिर एक-एक सप्ताह के अंतराल पर करीब तीन महीने तक बुलाया जाएगा। इसके बाद त्वचा सामान्य हो जाएगी।
अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. समीक भट्टाचार्य ने बताया कि इस तकनीक में जली हुई त्वचा के ठीक बगल में सामान्य त्वचा पर सिलिकॉन का एक गुब्बारा इंप्लांट किया जाता है। इसके करीब एक महीने के बाद इसे सेलाइन इंजेक्ट कर धीरे-धीरे फुलाया जाता है। गुब्बारे के फूलने से इसके ऊपर की सामान्य त्वचा भी बढ़ जाती है। इसके बाद जली हुई त्वचा को हटाकर उसके स्थान पर नई बनी त्वचा को लगा दिया जाता है। साथ ही सिलिकॉन गुब्बारे को भी निकाल लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन महीने का समय लगता है।
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के तहत हुई पहली प्लास्टिक सर्जरी
- छह-सात साल पहले जलने से युवती के गाल पर बन गया था निशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आरएमएल अस्पताल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के तहत दिल्ली की पहली प्लास्टिक सर्जरी करने का दावा किया है। यह आपरेशन उत्तर प्रदेश की 22 वर्षीय एक युवती का किया गया है। मरीज को बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. वीके तिवारी के अनुसार, उनके पास इस सप्ताह के शुरुआत में उत्तर प्रदेश से एक युवती आई। करीब छह-सात साल पहले आग से जलने की वजह से उसके दाएं गाल पर निशान बन गया था। जिससे वह काफी परेशान थी। उन्होंने बताया कि इसके लिए टिश्यू एक्सपेंडर तकनीक का सहारा लिया गया है। युवती को जल्द ही छुट्टी दे दी जाएगी। फिर एक-एक सप्ताह के अंतराल पर करीब तीन महीने तक बुलाया जाएगा। इसके बाद त्वचा सामान्य हो जाएगी।
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अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. समीक भट्टाचार्य ने बताया कि इस तकनीक में जली हुई त्वचा के ठीक बगल में सामान्य त्वचा पर सिलिकॉन का एक गुब्बारा इंप्लांट किया जाता है। इसके करीब एक महीने के बाद इसे सेलाइन इंजेक्ट कर धीरे-धीरे फुलाया जाता है। गुब्बारे के फूलने से इसके ऊपर की सामान्य त्वचा भी बढ़ जाती है। इसके बाद जली हुई त्वचा को हटाकर उसके स्थान पर नई बनी त्वचा को लगा दिया जाता है। साथ ही सिलिकॉन गुब्बारे को भी निकाल लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन महीने का समय लगता है।
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