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शाही सवारी पैलेस ऑन व्हील्स पर्यटकों को लेकर रवाना
Updated Thu, 22 Nov 2018 06:35 AM IST
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शाही सवारी पैलेस ऑन व्हील्स 42 पर्यटकों को लेकर रवाना
- यात्रा के लिए प्रति सवारी 2.40 लाख का टिकट, 10 साल बाद स्टीम इंजन से चलाई ट्रेन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । रेलवे की शाही सवारी बुधवार को सफदरजंग स्टेशन से पर्यटकों को लेकर रवाना हो गई। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन के यात्रियों ने पहली बार स्टीम इंजन ‘आजाद’ का भी लुत्फ उठाया। हालांकि पटेल नगर के बाद ट्रेन का इंजन बदल दिया गया।
शाही सवारी वाली इस ट्रेन से कुल 42 पर्यटक रवाना हुए। यात्रियों को फूलमाला पहना कर ट्रेन को रवाना किया गया। प्रति यात्रियों से यात्रा के लिए कुल 2 लाख 40 हजार रुपये लिए गए। यात्रियों को 15 किलोमीटर तक भाप से चालित इंजन की सवारी कराई गई। 10 साल बाद इस ट्रेन को स्टीम इंजन से चलाई गई। राजा महाराजाओं की राजसी ठाठ के साथ पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन को बुधवार की शाम रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन सफरदजंग से जयपुर, सवाई माधवपुर, चित्तौड़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर व आगरा तक यात्रियों को पर्यटन के लिए घुमा कर वापस दिल्ली पहुंचेगी।
पहली बार भाप इंजन के साथ दौड़ी ट्रेन
भारत की आजादी के दौरान भारत पहुंची 7200 सिरीज की यह ट्रेन भाप इंजन के साथ पहली बार दौड़ी। इस ट्रेन में कई कैटगरी हैं। ट्रेन को राजस्थान टूर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की तरफ से चलाया जाता है। शाही ट्रेन में यात्रा करने के लिए प्रति व्यक्ति 40 हजार रुपये एक रात के लिए वसूला जाता है। कुल 7 रात और 8 दिन का सफर यह ट्रेन कराती है। अक्टूबर से मार्च तक यह ट्रेन रेल ट्रैक पर होती है।
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ये है खासियत
शाही सवारी वाली ट्रेन में इस बार कई बदलाव किए गए हैं। ट्रेन को बाहर से काफी खूबसूरत लुक दिया गया है। अंदर बेहतरीन कारपेट, स्नानघर के साथ-साथ सभी जगह पर एलईडी लाइट लगाई गई है। पूरे ट्रेन में बायो टॉयलेट लगाया गया है। दोनों रेस्तरां और बार को यात्रियों के लिए नए तरीके से डिजाइन किया गया है। सोने के लिए फाइव स्टार होटल की तरह बिस्तर लगाए गए हैं।
यात्रा से अलग अनुभूति होगी, प्राचीन संस्कृति को जानने का मिलेगा मौका
परिवार के साथ यात्रा कर रहे एनआरआई मुकेश सिंह का कहना था कि इस यात्रा से राजा महाराजाओं के बारे में जानने को मिलेगा। बच्चे भी प्राचीन भारतीय संस्कृति व परंपराओं से अवगत होंगे। अन्य विदेशी सैलानियों का कहना था पैलेस ऑन व्हील नाम से ही पता चलता है कि यह ट्रेन चलती-फिरती महलों वाली सुविधा से युक्त होगी। इसमें यात्रा करने से एक अलग ही अनुभूति होगी। यात्रा पर निकले बच्चों व महिलाओं में स्टीम इंजन व ट्रेन के भीतरी सौंदर्य को लेकर सबसे अधिक उत्साह दिखने को मिला।
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- यात्रा के लिए प्रति सवारी 2.40 लाख का टिकट, 10 साल बाद स्टीम इंजन से चलाई ट्रेन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । रेलवे की शाही सवारी बुधवार को सफदरजंग स्टेशन से पर्यटकों को लेकर रवाना हो गई। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन के यात्रियों ने पहली बार स्टीम इंजन ‘आजाद’ का भी लुत्फ उठाया। हालांकि पटेल नगर के बाद ट्रेन का इंजन बदल दिया गया।
शाही सवारी वाली इस ट्रेन से कुल 42 पर्यटक रवाना हुए। यात्रियों को फूलमाला पहना कर ट्रेन को रवाना किया गया। प्रति यात्रियों से यात्रा के लिए कुल 2 लाख 40 हजार रुपये लिए गए। यात्रियों को 15 किलोमीटर तक भाप से चालित इंजन की सवारी कराई गई। 10 साल बाद इस ट्रेन को स्टीम इंजन से चलाई गई। राजा महाराजाओं की राजसी ठाठ के साथ पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन को बुधवार की शाम रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन सफरदजंग से जयपुर, सवाई माधवपुर, चित्तौड़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर व आगरा तक यात्रियों को पर्यटन के लिए घुमा कर वापस दिल्ली पहुंचेगी।
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पहली बार भाप इंजन के साथ दौड़ी ट्रेन
भारत की आजादी के दौरान भारत पहुंची 7200 सिरीज की यह ट्रेन भाप इंजन के साथ पहली बार दौड़ी। इस ट्रेन में कई कैटगरी हैं। ट्रेन को राजस्थान टूर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की तरफ से चलाया जाता है। शाही ट्रेन में यात्रा करने के लिए प्रति व्यक्ति 40 हजार रुपये एक रात के लिए वसूला जाता है। कुल 7 रात और 8 दिन का सफर यह ट्रेन कराती है। अक्टूबर से मार्च तक यह ट्रेन रेल ट्रैक पर होती है।
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ये है खासियत
शाही सवारी वाली ट्रेन में इस बार कई बदलाव किए गए हैं। ट्रेन को बाहर से काफी खूबसूरत लुक दिया गया है। अंदर बेहतरीन कारपेट, स्नानघर के साथ-साथ सभी जगह पर एलईडी लाइट लगाई गई है। पूरे ट्रेन में बायो टॉयलेट लगाया गया है। दोनों रेस्तरां और बार को यात्रियों के लिए नए तरीके से डिजाइन किया गया है। सोने के लिए फाइव स्टार होटल की तरह बिस्तर लगाए गए हैं।
यात्रा से अलग अनुभूति होगी, प्राचीन संस्कृति को जानने का मिलेगा मौका
परिवार के साथ यात्रा कर रहे एनआरआई मुकेश सिंह का कहना था कि इस यात्रा से राजा महाराजाओं के बारे में जानने को मिलेगा। बच्चे भी प्राचीन भारतीय संस्कृति व परंपराओं से अवगत होंगे। अन्य विदेशी सैलानियों का कहना था पैलेस ऑन व्हील नाम से ही पता चलता है कि यह ट्रेन चलती-फिरती महलों वाली सुविधा से युक्त होगी। इसमें यात्रा करने से एक अलग ही अनुभूति होगी। यात्रा पर निकले बच्चों व महिलाओं में स्टीम इंजन व ट्रेन के भीतरी सौंदर्य को लेकर सबसे अधिक उत्साह दिखने को मिला।