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मरीजों के प्रति ज्यादा सेवाभाव भी दे सकता है मुसीबत
Updated Fri, 23 Nov 2018 07:56 AM IST
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मरीजों के प्रति ज्यादा सेवाभाव भी दे सकता है मुसीबत
- सीओपीडी के मरीजों को घर में कैद करने से होता है नुकसान
- बीड़ी सिगरेट पीने वालों में सीओपीडी बीमारी की आशंका कई गुना ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मरीजों के प्रति ज्यादा सेवाभाव भी उनको नुकसान दे सकता है। अकसर बीमारी होने के बाद मरीज को बिस्तर पर आराम करने के लिए ही परिजन जोर देते हैं, जबकि ज्यादातर बीमारियों में ही ये संभव है। डॉक्टरों से बगैर सलाह लिए दिन भर बेड रेस्ट कराने के कारण उन मरीजों की तकलीफ कम होने की बजाए बढ़ने लगती है। फेफड़ों और श्वास से जुड़ी बीमारी सीओपीडी ग्रस्त मरीजों के लिए ये कई गुना ज्यादा परेशानी खड़ी हो सकती है क्योंकि उन्हें दवाओं से ज्यादा व्यायाम की आवश्यकता होती है। ये कहना है मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. दीपक तलवार का। सीओपीडी पुरानी अवरोधक फुफ्फुसीय बीमारी है, जो 12 फीसदी की प्रसार दर के साथ है। डॉ. तलवार ने बताया कि जो लोग बीड़ी सिगरेट पीते हैं, उन्हें सीओपीडी बीमारी की आशंका कई गुना ज्यादा होती है, लेकिन घरों में अंगीठी, हीटर, गीजर इत्यादि के प्रदूषण से भी ये बीमारी होती है। यही वजह है कि देश में ग्रामीण अंचलों तक ये बीमारी फैली है और सबसे ज्यादा महिलाएं इसकी शिकार हैं। उन्होंने ये भी बताया कि देश में सीओपीडी मरीजों के लिए फिजियोथैरेपी की सुविधा शायद ही कुछ अस्पतालों में उपलब्ध है। सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही, जबकि पूरे वर्ष में प्रदूषण और मौसम में सर्द बदलाव के दौरान मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के कारण उनके यहां 20 से 25 फीसदी ओपीडी में इजाफा हो रहा है। डॉ. तलवार ने ये भी बताया कि सीओपीडी दुनिया में मौत का चौथा और भारत में दूसरा सबसे आम कारण बन चुका है। भारत में सबसे ज्यादा स्थिति गंभीर है। घर में खाना पकाने और हीटिंग के लिए बॉयोमास ईंधन का प्रयोग बीमारी को न्योता दे रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि सीओपीडी मरीज के लिए सप्ताह में 3 से 4 बार 45-45 मिनट के लिए व्यायाम बेहद आवश्यक है। हालांकि इस दौरान ऑक्सीजन की मात्रा भी जांचनी चाहिए। ताकि मरीज को तकलीफ न हो।
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- सीओपीडी के मरीजों को घर में कैद करने से होता है नुकसान
- बीड़ी सिगरेट पीने वालों में सीओपीडी बीमारी की आशंका कई गुना ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मरीजों के प्रति ज्यादा सेवाभाव भी उनको नुकसान दे सकता है। अकसर बीमारी होने के बाद मरीज को बिस्तर पर आराम करने के लिए ही परिजन जोर देते हैं, जबकि ज्यादातर बीमारियों में ही ये संभव है। डॉक्टरों से बगैर सलाह लिए दिन भर बेड रेस्ट कराने के कारण उन मरीजों की तकलीफ कम होने की बजाए बढ़ने लगती है। फेफड़ों और श्वास से जुड़ी बीमारी सीओपीडी ग्रस्त मरीजों के लिए ये कई गुना ज्यादा परेशानी खड़ी हो सकती है क्योंकि उन्हें दवाओं से ज्यादा व्यायाम की आवश्यकता होती है। ये कहना है मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. दीपक तलवार का। सीओपीडी पुरानी अवरोधक फुफ्फुसीय बीमारी है, जो 12 फीसदी की प्रसार दर के साथ है। डॉ. तलवार ने बताया कि जो लोग बीड़ी सिगरेट पीते हैं, उन्हें सीओपीडी बीमारी की आशंका कई गुना ज्यादा होती है, लेकिन घरों में अंगीठी, हीटर, गीजर इत्यादि के प्रदूषण से भी ये बीमारी होती है। यही वजह है कि देश में ग्रामीण अंचलों तक ये बीमारी फैली है और सबसे ज्यादा महिलाएं इसकी शिकार हैं। उन्होंने ये भी बताया कि देश में सीओपीडी मरीजों के लिए फिजियोथैरेपी की सुविधा शायद ही कुछ अस्पतालों में उपलब्ध है। सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही, जबकि पूरे वर्ष में प्रदूषण और मौसम में सर्द बदलाव के दौरान मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के कारण उनके यहां 20 से 25 फीसदी ओपीडी में इजाफा हो रहा है। डॉ. तलवार ने ये भी बताया कि सीओपीडी दुनिया में मौत का चौथा और भारत में दूसरा सबसे आम कारण बन चुका है। भारत में सबसे ज्यादा स्थिति गंभीर है। घर में खाना पकाने और हीटिंग के लिए बॉयोमास ईंधन का प्रयोग बीमारी को न्योता दे रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि सीओपीडी मरीज के लिए सप्ताह में 3 से 4 बार 45-45 मिनट के लिए व्यायाम बेहद आवश्यक है। हालांकि इस दौरान ऑक्सीजन की मात्रा भी जांचनी चाहिए। ताकि मरीज को तकलीफ न हो।