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गर्भ में शिशु को कुपोषित कर रहे हैं पीएम 2.5 के कण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Nov 2018 05:33 AM IST
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- फोटो : डेमो
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प्रदूषण से गैस चैंबर बनी दिल्ली में इस समय लोगों का दम घुट रहा है। गर्भवतियों को खासतौर पर डॉक्टरों ने प्रदूषण से बचने की सलाह दी है। इनका कहना है कि पीएम 2.5 के कण गर्भ में शिशुओं को कुपोषित कर सकते हैं।
हाल ही में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर चरम पर है। लोग घरों में धूपबत्ती या अगरबत्ती जलाने से बचें। धूम्रपान तत्काल बंद करें। पीएम 2.5 के कण से हार्ट अटैक की संभावना बढ़ रही है।
आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि प्रदूषण की वजह से हार्ट अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए ज्यादा दूरी के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें।
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वहीं, वेंक्टेश्वर अस्पताल के डॉ. अशोक राजपूत का कहना है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में सीओपीडी बीमारियों के बढ़ने की संभावना ज्यादा है। खांसी, सांस में तकलीफ, घबराहट और दम फूलने जैसी परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से मिलें।
65 लाख की मशीन से अस्थमा पर वार करेगा एम्स
एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि प्रदूषण के कारण दवाओं का असर भी कम होने लगा है। इसलिए अब ब्रांकल थर्मोप्लास्टी के जरिए अस्थमा मरीजों को एम्स में उपचार मिलेगा। इसके लिए एम्स ने 65 लाख रुपए में मशीनें खरीदी है, जिससे पहली बार मंगलवार को 62 वर्ष की महिला का इलाज किया गया। दरअसल, अस्थमा के मरीजों को एलर्जी के कारण सांस की नली में सूजन व सिकुड़न पैदा हो जाती है। इससे श्वसन तंत्र की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और मरीज का दम फूलने लगता है। नई तकनीक में थर्मल हीट देकर असामान्य मांसपेशियों को जलाकर नष्ट कर दिया जाता है।
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हाल ही में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर चरम पर है। लोग घरों में धूपबत्ती या अगरबत्ती जलाने से बचें। धूम्रपान तत्काल बंद करें। पीएम 2.5 के कण से हार्ट अटैक की संभावना बढ़ रही है।
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आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि प्रदूषण की वजह से हार्ट अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए ज्यादा दूरी के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें।
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वहीं, वेंक्टेश्वर अस्पताल के डॉ. अशोक राजपूत का कहना है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में सीओपीडी बीमारियों के बढ़ने की संभावना ज्यादा है। खांसी, सांस में तकलीफ, घबराहट और दम फूलने जैसी परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से मिलें।
65 लाख की मशीन से अस्थमा पर वार करेगा एम्स
एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि प्रदूषण के कारण दवाओं का असर भी कम होने लगा है। इसलिए अब ब्रांकल थर्मोप्लास्टी के जरिए अस्थमा मरीजों को एम्स में उपचार मिलेगा। इसके लिए एम्स ने 65 लाख रुपए में मशीनें खरीदी है, जिससे पहली बार मंगलवार को 62 वर्ष की महिला का इलाज किया गया। दरअसल, अस्थमा के मरीजों को एलर्जी के कारण सांस की नली में सूजन व सिकुड़न पैदा हो जाती है। इससे श्वसन तंत्र की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और मरीज का दम फूलने लगता है। नई तकनीक में थर्मल हीट देकर असामान्य मांसपेशियों को जलाकर नष्ट कर दिया जाता है।