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रामलीला में अटल की जीवन लीला
Updated Fri, 12 Oct 2018 06:48 AM IST
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रामलीला में अटल की जीवन लीला
नई दिल्ली। द्वारका की श्री रामलीला सोसायटी ने पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन लीला का मंचन किया। आधे घंटे तक पूर्व प्रधानमंत्री की जीवन गाथा दिखाई गई। रामलीला में सभी पात्र नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के हैं। ब्यूरो
कौशल्या का हरण कर संदूक में रख बहा दिया लंकापति रावण ने
नई दिल्ली। कौशल्या का हरण कर उन्हें संदूक में रख लंकापति रावण ने एक नदी में बहा दिया। ये सुनकर शायद आपको थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन दिल्ली की एक रामलीला में ऐसा ही प्रसंग बृहस्पतिवार को मंचित किया गया, जिसने न सिर्फ दर्शकों को चौंकाया, बल्कि रामायण का एक अलग स्वरूप समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। दरअसल आनंद रामायण से लिए इस प्रसंग में ब्रह्मा से अपनी मृत्यु का रहस्य पता लगने के बाद रावण कौशल पुत्री कौशल्या का अपहरण कर लेता है। चूंकि कौशल्या के पुत्र से ही उसकी मृत्यु नियति में लिखी थी, इसलिए रावण ने कौशल्या का अपहरण किया था। संदूक में रखने के बाद कौशल्या को नदी में बहा दिया था, लेकिन नदी में तैर रही तिमिंगल नामक मछली के मुंह में जाकर संदूक फंस गया। ये बात प्रजा के जरिए दशरथ के मंत्री सुमित्र को पता चली और वे कौशल्या को बचाकर महल तक लाए। लीला के दौरान गंधर्व विवाह भी देखने को मिला। ब्यूरो
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नई दिल्ली। द्वारका की श्री रामलीला सोसायटी ने पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन लीला का मंचन किया। आधे घंटे तक पूर्व प्रधानमंत्री की जीवन गाथा दिखाई गई। रामलीला में सभी पात्र नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के हैं। ब्यूरो
कौशल्या का हरण कर संदूक में रख बहा दिया लंकापति रावण ने
नई दिल्ली। कौशल्या का हरण कर उन्हें संदूक में रख लंकापति रावण ने एक नदी में बहा दिया। ये सुनकर शायद आपको थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन दिल्ली की एक रामलीला में ऐसा ही प्रसंग बृहस्पतिवार को मंचित किया गया, जिसने न सिर्फ दर्शकों को चौंकाया, बल्कि रामायण का एक अलग स्वरूप समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। दरअसल आनंद रामायण से लिए इस प्रसंग में ब्रह्मा से अपनी मृत्यु का रहस्य पता लगने के बाद रावण कौशल पुत्री कौशल्या का अपहरण कर लेता है। चूंकि कौशल्या के पुत्र से ही उसकी मृत्यु नियति में लिखी थी, इसलिए रावण ने कौशल्या का अपहरण किया था। संदूक में रखने के बाद कौशल्या को नदी में बहा दिया था, लेकिन नदी में तैर रही तिमिंगल नामक मछली के मुंह में जाकर संदूक फंस गया। ये बात प्रजा के जरिए दशरथ के मंत्री सुमित्र को पता चली और वे कौशल्या को बचाकर महल तक लाए। लीला के दौरान गंधर्व विवाह भी देखने को मिला। ब्यूरो
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