आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को अब एम्स का ही सहारा, अस्पताल प्रबंधन ने एमओयू किया साइन
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आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को अब देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स का सहारा मिल गया। प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत मंगलवार को अस्पताल प्रबंधन ने एमओयू पर साइन किया है। बताया जा रहा है कि अब कुछ ही दिनों में केंद्र सरकार के आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल भी इस सूची में शामिल हो जाएंगे। इससे पोर्टबिलिटी के आधार पर आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को दिल्ली में उपचार कराने की राह आसान हो गई। दरअसल, दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए केंद्र से हाथ नहीं मिलाया है। इसलिए निजी अस्पताल और दिल्ली सरकार के अस्पतालों में इसके लाभार्थियों को इस सुविधा से फिलहाल वंचित रहना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और पीएमजेएवाई के सीईओ डॉ. इंदुभूषण ने एमओयू पर साइन किए। इस दौरान एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया ने बताया कि आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के लिए एम्स में बाकायदा आयुष्मान मित्र और डेस्क भी बनाई जाएगी। इन मरीजों को हर गंभीर बीमारी का उपचार मिलेगा। हालांकि एम्स में कई तरह की जांचें और दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें डॉक्टरों के पास बाहर से बुलाने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होता। ऐसे में आयुष्मान भारत के लाभार्थी के लिए विकल्प की जानकारी नहीं दी गई है।
डॉ. इंदुभूषण का कहना है कि इस योजना के शुरू होते ही दो दिन में विभिन्न राज्यों के करीब एक हजार से ज्यादा लाभार्थियों को इसका फायदा मिला है। उन्होंने बताया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया और सफदरजंग अस्पताल से भी आने वाले दिनों में एमओयू होने वाला है, जिसके बाद देश के करीब 11 करोड़ परिवारों को दिल्ली में इन तीन अस्पतालों से सहारा मिलेगा।