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शाहबेरी में अवैध निर्माण पर खंगाली जाएगी पुलिस की जीडी
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:12 AM IST
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शाहबेरी में अवैध निर्माण पर
खंगाली जाएगी थाने की जीडी
मंडलायुक्त की समिति ने पुलिस से मांगी वर्ष 2011 से अब तक की रिपोर्ट
- मजिस्ट्रेटी जांच में पुलिस ने किसी भी तरह की मदद मांगे जाने से किया था इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी हादसे पर मेरठ मंडलायुक्त की जांच में पुलिस की जीडी (जनरल डायरी) को खंगाला जाएगा। इससे पता चलेगा कि वर्ष 2011 के बाद से प्राधिकरण ने शाहबेरी में अवैध निर्माण को हटाने के लिए कितनी बार पुलिस से मदद मांगी है। दरअसल, मजिस्ट्रेटी जांच में पुलिस ने मदद मांगने से इंकार किया है। उधर, प्राधिकरण ने पुलिस से मदद नहीं मिलने की बात कहीं है।
शाहबेरी गांव में 17 जुलाई को दो बहुमंजिला इमारत गिर गई थीं। इसमें नौ लोगों की मौत हुई। शासन स्तर से मामले की जांच मेरठ मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। हाल ही में मंडलायुक्त ने सहयोग के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति ने सोमवार को शाहबेरी गांव पहुंचकर जांच की थी। जांच अधिकारियों ने बताया कि पुलिस से वर्ष 2011 के बाद से घटना से पहले तक जीडी का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसमें देखा जाएगा कि प्राधिकरण ने कितनी बार पुलिस से निर्माण को हटाने के लिए फोर्स मांगी थी। दरअसल, मजिस्ट्रेटी जांच में प्राधिकरण ने पुलिस बल नहीं मिलने का हवाला दिया है। प्राधिकरण के इस दावे की सच्चाई पता लगाने के लिए समिति रिकॉर्ड का मुआयना करेगी। समिति ने प्राधिकरण से पूछा है कि शाहबेरी गांव में कितनी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है और कितनी अवैध बिल्डिंग बनी हुई हैं।
मजिस्ट्रेटी जांच में नाम आने से खलबली
मजिस्ट्रेटी जांच में प्राधिकरण के पांच अफसरों का नाम सामने आया है। बिल्डर के साथ इनको भी अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह जानकारी मिलने के बाद से प्राधिकरण के अफसरों में खलबली मची है। उस क्षेत्र में तैनात रहे अफसर उन पांच नामों को जानने का प्रयास कर रहे हैं।
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‘मंडलायुक्त की जांच में पुलिस की जीडी को खंगाला जा रहा है। वर्ष 2011 से अब तक की जांच होगी। उससे पता लगाया जाएगा कि प्राधिकरण ने कितनी बार अवैध निर्माण को रोकने के लिए मदद मांगी थी।’
- दिवाकर सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)
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खंगाली जाएगी थाने की जीडी
मंडलायुक्त की समिति ने पुलिस से मांगी वर्ष 2011 से अब तक की रिपोर्ट
- मजिस्ट्रेटी जांच में पुलिस ने किसी भी तरह की मदद मांगे जाने से किया था इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी हादसे पर मेरठ मंडलायुक्त की जांच में पुलिस की जीडी (जनरल डायरी) को खंगाला जाएगा। इससे पता चलेगा कि वर्ष 2011 के बाद से प्राधिकरण ने शाहबेरी में अवैध निर्माण को हटाने के लिए कितनी बार पुलिस से मदद मांगी है। दरअसल, मजिस्ट्रेटी जांच में पुलिस ने मदद मांगने से इंकार किया है। उधर, प्राधिकरण ने पुलिस से मदद नहीं मिलने की बात कहीं है।
शाहबेरी गांव में 17 जुलाई को दो बहुमंजिला इमारत गिर गई थीं। इसमें नौ लोगों की मौत हुई। शासन स्तर से मामले की जांच मेरठ मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। हाल ही में मंडलायुक्त ने सहयोग के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति ने सोमवार को शाहबेरी गांव पहुंचकर जांच की थी। जांच अधिकारियों ने बताया कि पुलिस से वर्ष 2011 के बाद से घटना से पहले तक जीडी का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसमें देखा जाएगा कि प्राधिकरण ने कितनी बार पुलिस से निर्माण को हटाने के लिए फोर्स मांगी थी। दरअसल, मजिस्ट्रेटी जांच में प्राधिकरण ने पुलिस बल नहीं मिलने का हवाला दिया है। प्राधिकरण के इस दावे की सच्चाई पता लगाने के लिए समिति रिकॉर्ड का मुआयना करेगी। समिति ने प्राधिकरण से पूछा है कि शाहबेरी गांव में कितनी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है और कितनी अवैध बिल्डिंग बनी हुई हैं।
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मजिस्ट्रेटी जांच में नाम आने से खलबली
मजिस्ट्रेटी जांच में प्राधिकरण के पांच अफसरों का नाम सामने आया है। बिल्डर के साथ इनको भी अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह जानकारी मिलने के बाद से प्राधिकरण के अफसरों में खलबली मची है। उस क्षेत्र में तैनात रहे अफसर उन पांच नामों को जानने का प्रयास कर रहे हैं।
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‘मंडलायुक्त की जांच में पुलिस की जीडी को खंगाला जा रहा है। वर्ष 2011 से अब तक की जांच होगी। उससे पता लगाया जाएगा कि प्राधिकरण ने कितनी बार अवैध निर्माण को रोकने के लिए मदद मांगी थी।’
- दिवाकर सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)