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काव्य संग्रह ‘मतदान केन्द्र पर झपकी’ का लोकार्पण
Updated Fri, 14 Sep 2018 06:40 AM IST
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काव्य संग्रह ‘मतदान केंद्र पर झपकी’ का लोकार्पण
नई दिल्ली। यशस्वी कवि स्व. केदारनाथ सिंह के काव्य-संग्रह ‘मतदान केंद्र पर झपकी’ का वीरवार को लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने की जबकि इस दौरान उदय प्रकाश, आशुतोष कुमार, प्रियदर्शन, सुनील कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। स्व. केदारनाथ सिंह स्वतंत्र भारत के उन हिंदी कवियों में रहे, जिन्हें अखिल भारतीय स्तर पर ख्याति मिली। विदेश में कई भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद किया गया, जो अभी भी स्मृति में जीवित हैं। मतदान केंद्र पर झपकी काव्य संग्रह कवि का पक्ष रखती है। इनकी कविताएं हिंसा के विशाल परदे के आगे एक मनुष्य के हिंसक होने से इंकार हैं। केदार की काव्य-संवेदना शहरी और नागर नहीं, ग्रामीण और कस्बाई हैं। केदारनाथ सिंह के सुपुत्र सुनील कुमार सिंह ने कहा कि उनके पिता की पीड़ा में भी जीवन को देखने की दृष्टि काफी आशावादी थी। आशुतोष कुमार ने कहा कि कैसी कविताएं पढने से जिंदगी जीने का अनुभव बदलता है यह केदारनाथ सिंह की कविताओं से महसूस किया जा सकता है। ब्यूरो
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नई दिल्ली। यशस्वी कवि स्व. केदारनाथ सिंह के काव्य-संग्रह ‘मतदान केंद्र पर झपकी’ का वीरवार को लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने की जबकि इस दौरान उदय प्रकाश, आशुतोष कुमार, प्रियदर्शन, सुनील कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। स्व. केदारनाथ सिंह स्वतंत्र भारत के उन हिंदी कवियों में रहे, जिन्हें अखिल भारतीय स्तर पर ख्याति मिली। विदेश में कई भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद किया गया, जो अभी भी स्मृति में जीवित हैं। मतदान केंद्र पर झपकी काव्य संग्रह कवि का पक्ष रखती है। इनकी कविताएं हिंसा के विशाल परदे के आगे एक मनुष्य के हिंसक होने से इंकार हैं। केदार की काव्य-संवेदना शहरी और नागर नहीं, ग्रामीण और कस्बाई हैं। केदारनाथ सिंह के सुपुत्र सुनील कुमार सिंह ने कहा कि उनके पिता की पीड़ा में भी जीवन को देखने की दृष्टि काफी आशावादी थी। आशुतोष कुमार ने कहा कि कैसी कविताएं पढने से जिंदगी जीने का अनुभव बदलता है यह केदारनाथ सिंह की कविताओं से महसूस किया जा सकता है। ब्यूरो