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आशुतोष व आशीष के जाने पर आप में नहीं कोई सियासी हलचल
Updated Thu, 23 Aug 2018 10:16 PM IST
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आशुतोष व आशीष के जाने पर आप में नहीं कोई सियासी हलचल
-पार्टी रणनीतिकारों की राय, बगैर किसी मनमुटाव के अपनी मर्जी से बाहर गए दोनों नेताओं के लिए हर वक्त खुले रहेंगे दरवाजे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) से आशुतोष व आशीष खेतान की विदाई पर बेशक दिल्ली के सियासी गलियारे में गरमी हो, लेकिन पार्टी इसे लेकर ज्यादा फिक्रमंद नहीं दिखती। पार्टी रणनीतिकारों को मानना है कि शांति से इस्तीफा देने वाले दो प्रोफेशनल साथियों के पार्टी छोड़ देने की सियासी चर्चा का आम लोगों से ज्यादा रिश्ता नहीं है। खासतौर से इसलिए भी कि दोनों ने पार्टी नेतृत्व से कोई नाराजगी भी नहीं जताई है।
एक हफ्ते में आशुतोष व आशीष खेतान के पार्टी छोड़ने से सियासी गलियारे में चर्चा का बाजार गरम है कि आप एक व्यक्ति की पार्टी हो गई है। सभी बड़े चेहरों का एक के बाद आप से मोहभंग हो रहा है। आप के पूर्व सहयोगियों ने नेतृत्व पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए यहां तक कह डाला कि एक आंदोलन से निकली पार्टी पथभ्रष्ट हो गई है।
उधर, आप रणनीतिकारों का कहना है कि दोनों मीडिया प्रोफेशलन रहे हैं। पहली सरकार के गठन के बाद दोनों पार्टी में शामिल हुए। उस वक्त सियासी पंडितों ने पार्टी के कोर वालेंटियर, आंदोलन के साथियों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। साथ ही बाहरी होने की बात कहकर तंज भी कसा था। अब जब दोनों अपनी मर्जी से बाहर जा रहे हैं तो वही सियासी पंडित आप नेतृत्व पर अपने नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं।
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एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दो साथियों का पार्टी छोड़ देना व्यक्तिगत तौर पर आप के हर नेता का नुकसान है, लेकिन आप की सियासी सेहत पर इसका असर नहीं पड़ेगा। पार्टी मानकर चल रही है कि दोनों बगैर किसी मतभेद के अपनी मर्जी से राजनीति से ही किनारा कर रहे हैं। दोनों को पार्टी की नीतियों या नेतृत्व से कोई मनमुटाव भी नहीं है। भविष्य में अगर उनका मन बदला तो पार्टी उनका फिर से स्वागत करेगी।
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-पार्टी रणनीतिकारों की राय, बगैर किसी मनमुटाव के अपनी मर्जी से बाहर गए दोनों नेताओं के लिए हर वक्त खुले रहेंगे दरवाजे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) से आशुतोष व आशीष खेतान की विदाई पर बेशक दिल्ली के सियासी गलियारे में गरमी हो, लेकिन पार्टी इसे लेकर ज्यादा फिक्रमंद नहीं दिखती। पार्टी रणनीतिकारों को मानना है कि शांति से इस्तीफा देने वाले दो प्रोफेशनल साथियों के पार्टी छोड़ देने की सियासी चर्चा का आम लोगों से ज्यादा रिश्ता नहीं है। खासतौर से इसलिए भी कि दोनों ने पार्टी नेतृत्व से कोई नाराजगी भी नहीं जताई है।
एक हफ्ते में आशुतोष व आशीष खेतान के पार्टी छोड़ने से सियासी गलियारे में चर्चा का बाजार गरम है कि आप एक व्यक्ति की पार्टी हो गई है। सभी बड़े चेहरों का एक के बाद आप से मोहभंग हो रहा है। आप के पूर्व सहयोगियों ने नेतृत्व पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए यहां तक कह डाला कि एक आंदोलन से निकली पार्टी पथभ्रष्ट हो गई है।
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उधर, आप रणनीतिकारों का कहना है कि दोनों मीडिया प्रोफेशलन रहे हैं। पहली सरकार के गठन के बाद दोनों पार्टी में शामिल हुए। उस वक्त सियासी पंडितों ने पार्टी के कोर वालेंटियर, आंदोलन के साथियों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। साथ ही बाहरी होने की बात कहकर तंज भी कसा था। अब जब दोनों अपनी मर्जी से बाहर जा रहे हैं तो वही सियासी पंडित आप नेतृत्व पर अपने नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं।
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एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दो साथियों का पार्टी छोड़ देना व्यक्तिगत तौर पर आप के हर नेता का नुकसान है, लेकिन आप की सियासी सेहत पर इसका असर नहीं पड़ेगा। पार्टी मानकर चल रही है कि दोनों बगैर किसी मतभेद के अपनी मर्जी से राजनीति से ही किनारा कर रहे हैं। दोनों को पार्टी की नीतियों या नेतृत्व से कोई मनमुटाव भी नहीं है। भविष्य में अगर उनका मन बदला तो पार्टी उनका फिर से स्वागत करेगी।