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दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक डॉ. अरोड़ा को मिला सम्मान
Updated Sun, 19 Aug 2018 07:52 PM IST
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दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक डॉ. अरोड़ा को मिला सम्मान
नई दिल्ली। तंबाकू नियंत्रण को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने पर स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा को सम्मानित किया गया है। उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के भारत प्रभारी हेंक बेकेडम ने वर्ल्ड नो टोबैको डे 2018 अवार्ड से नवाजा। डॉ. अरोड़ा दक्षिण एशिया के 11 देशों में तंबाकू नियंत्रण के लिए बेहतरीन कार्य के लिए इस सम्मान को पाने वाले इस वर्ष एक मात्र भारतीय हैं। डॉ. अरोड़ा का कहना है कि सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत तंबाकू प्रचलन में 2020 तक 15 प्रतिशत और 2025 तक 30 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। दिल्ली ने वर्ष 2017 से पहले ही इन लक्ष्यों को पूरा कर लिया है। उनका दावा है कि दिल्ली में पिछले छह साल में तंबाकू प्रचलन में करीब साढ़े छह प्रतिशत की कमी आई है, जो शेष भारत के औसत के आंकड़े से अधिक है। वहीं धूम्रपान करने वालों की संख्या में 35 प्रतिशत की कमी आई है जबकि शेष भारत में यह आंकड़ा महज 23 प्रतिशत की कमी का है। वहीं गुटखा सेवन करने वालों की संख्या में 63 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है जबकि शेष भारत में यह आंकड़ा सिर्फ 17 प्रतिशत का है। ब्यूरो
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नई दिल्ली। तंबाकू नियंत्रण को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने पर स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा को सम्मानित किया गया है। उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के भारत प्रभारी हेंक बेकेडम ने वर्ल्ड नो टोबैको डे 2018 अवार्ड से नवाजा। डॉ. अरोड़ा दक्षिण एशिया के 11 देशों में तंबाकू नियंत्रण के लिए बेहतरीन कार्य के लिए इस सम्मान को पाने वाले इस वर्ष एक मात्र भारतीय हैं। डॉ. अरोड़ा का कहना है कि सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत तंबाकू प्रचलन में 2020 तक 15 प्रतिशत और 2025 तक 30 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। दिल्ली ने वर्ष 2017 से पहले ही इन लक्ष्यों को पूरा कर लिया है। उनका दावा है कि दिल्ली में पिछले छह साल में तंबाकू प्रचलन में करीब साढ़े छह प्रतिशत की कमी आई है, जो शेष भारत के औसत के आंकड़े से अधिक है। वहीं धूम्रपान करने वालों की संख्या में 35 प्रतिशत की कमी आई है जबकि शेष भारत में यह आंकड़ा महज 23 प्रतिशत की कमी का है। वहीं गुटखा सेवन करने वालों की संख्या में 63 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है जबकि शेष भारत में यह आंकड़ा सिर्फ 17 प्रतिशत का है। ब्यूरो