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एनजीओ को फटकार
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:16 PM IST
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अनधिकृत निर्माण के खिलाफ याचिका लगाने वाले एनजीओ को फटकार
हाईकोर्ट ने कहा, बदला लेने व आपसी हिसाब पूरा करने के लिए दायर की याचिका
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली । हाईकोर्ट ने अनधिकृत निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है यह याचिकाएं बदला लेने या अपना हिसाब किताब पूरा करने के लिए दायर की जाती हैं। कोर्ट का सख्त रुख देखते हुए एनजीओ समाधान और निवारण अपराध और भ्रष्टाचार के वकील ने याचिकाएं वापस ले लीं।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अदालत इन याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगी। इसलिए याची इन्हें वापस ले या फिर नतीजा भुगतने के लिये तैयार रहे। उस पर भविष्य में जनहित याचिका दायर करने पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि यह संपत्तियां सरकारी जमीन पर नहीं थी। यह एनजीओ याचिका दायर करता है और निर्माण पर रोक लगवा देती है। एनजीओ ने 22 संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए 22 जनहित याचिकायें दायर की है। कोर्ट को यह सब समझ आता है।
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खंडपीठ ने कहा संविधान का अनुच्छेद 226 व जनहित याचिकायें इस सबके लिए नहीं है। कोर्ट के पास करने के लिए कई बेहतर चीजें हैं। कोर्ट इस सब में शामिल नहीं होगी। इस तरह की जनहित याचिकाओं से कोर्ट का समय बर्बाद होता है जबकि उसका कहीं बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को मूल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश व आदेश देने का अधिकार देता है।
कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि एनजीओ असल मुद्दों पर याचिका दायर करे।
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हाईकोर्ट ने कहा, बदला लेने व आपसी हिसाब पूरा करने के लिए दायर की याचिका
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली । हाईकोर्ट ने अनधिकृत निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है यह याचिकाएं बदला लेने या अपना हिसाब किताब पूरा करने के लिए दायर की जाती हैं। कोर्ट का सख्त रुख देखते हुए एनजीओ समाधान और निवारण अपराध और भ्रष्टाचार के वकील ने याचिकाएं वापस ले लीं।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अदालत इन याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगी। इसलिए याची इन्हें वापस ले या फिर नतीजा भुगतने के लिये तैयार रहे। उस पर भविष्य में जनहित याचिका दायर करने पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
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खंडपीठ ने कहा कि यह संपत्तियां सरकारी जमीन पर नहीं थी। यह एनजीओ याचिका दायर करता है और निर्माण पर रोक लगवा देती है। एनजीओ ने 22 संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए 22 जनहित याचिकायें दायर की है। कोर्ट को यह सब समझ आता है।
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खंडपीठ ने कहा संविधान का अनुच्छेद 226 व जनहित याचिकायें इस सबके लिए नहीं है। कोर्ट के पास करने के लिए कई बेहतर चीजें हैं। कोर्ट इस सब में शामिल नहीं होगी। इस तरह की जनहित याचिकाओं से कोर्ट का समय बर्बाद होता है जबकि उसका कहीं बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को मूल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश व आदेश देने का अधिकार देता है।
कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि एनजीओ असल मुद्दों पर याचिका दायर करे।