{"_id":"5b6328304f1c1ba13e8b4c14","slug":"1533225001182765-grnoida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम्रपाली ने फ्लैट खरीदारों से लिए थे 2765 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आम्रपाली ने फ्लैट खरीदारों से लिए थे 2765 करोड़
Updated Thu, 02 Aug 2018 10:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
हेडिंग: आम्रपाली ने फ्लैट खरीदारों से लिए थे 2765 करोड़
को-डेवलपर से 42 हजार खरीदारों को जगी आस
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। आम्रपाली ग्रुप ने नोएडा व ग्रेटर नोएडा के 42 हजार फ्लैट खरीदारों से 2765 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से अधिकांश रकम प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय इधर-उधर खर्च कर दी गई।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पांच प्रोजेक्ट आम्रपाली लेजर वैली, गोल्फ होम, सेंचुरियन पार्क, लेजर पार्क व ड्रीम वैली व नोएडा के प्रोजेक्ट में करीब 42 हजार फ्लैट खरीदार फंसे हुए हैं। घर की आस में उन्होंने 2765 करोड़ रुपये लगा रखे हैं, लेकिन बिल्डर ने खरीदारों के पैसे को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय खर्च कर दिया, जिससे अब खरीदार भटक रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पांच प्रोजेक्ट के लिए करीब 420 एकड़ जमीन आवंटित की है, जिसके एवज में करीब 2800 करोड़ रुपये प्राधिकरण का बकाया है। इसे बिल्डर दे नहीं पा रहा। अब को-डेवलपर से खरीदार व प्राधिकरण दोनों को आस जगी है। नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती कहती हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के रवैये से हम निराश थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हमें घर मिलने की आस दिलाई है।
को-डेवलपर से 42 हजार खरीदारों को जगी आस
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। आम्रपाली ग्रुप ने नोएडा व ग्रेटर नोएडा के 42 हजार फ्लैट खरीदारों से 2765 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से अधिकांश रकम प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय इधर-उधर खर्च कर दी गई।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पांच प्रोजेक्ट आम्रपाली लेजर वैली, गोल्फ होम, सेंचुरियन पार्क, लेजर पार्क व ड्रीम वैली व नोएडा के प्रोजेक्ट में करीब 42 हजार फ्लैट खरीदार फंसे हुए हैं। घर की आस में उन्होंने 2765 करोड़ रुपये लगा रखे हैं, लेकिन बिल्डर ने खरीदारों के पैसे को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय खर्च कर दिया, जिससे अब खरीदार भटक रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पांच प्रोजेक्ट के लिए करीब 420 एकड़ जमीन आवंटित की है, जिसके एवज में करीब 2800 करोड़ रुपये प्राधिकरण का बकाया है। इसे बिल्डर दे नहीं पा रहा। अब को-डेवलपर से खरीदार व प्राधिकरण दोनों को आस जगी है। नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती कहती हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के रवैये से हम निराश थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हमें घर मिलने की आस दिलाई है।
विज्ञापन