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उतरी दिल्ली नगर निगम के इलाके में भी बिल्डिंग गिरने का हो सकता है हादसा
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:36 PM IST
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम इलाके में भी
हो सकती हैं बिल्डिंग गिरने की घटना
- सर्वे में खानापूर्ति करने का पार्षदों ने लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीआर और दक्षिण दिल्ली नगर निगम के इलाके में बिल्डिंग गिरने की घटनाएं होने जैसे हादसे उत्तरी दिल्ली नगर निगम इलाके में होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि नगर निगम ने खतरनाक हो चुके मकानों का पता लगाने का सर्वे सही ढंग से नहीं किया। नगर निगम ने सर्वे के नाम पर खानापूर्ति की है। इसका खुलासा नगर निगम में विपक्षी दलों के पार्षदों ने ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष भाजपा के पार्षदों ने भी किया।
नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में बुधवार को खतरनाक बिल्डिंग के मुद्दे पर चर्चा हुई। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि नरेला जोन के खेड़ा कलां गांव के अलावा उनको दो ही बिल्डिंग पुरानी दिल्ली में खतरनाक मिलीं। उनके इस तर्क पर भाजपा की पूनम पराशर ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुबारिकपुर वार्ड में नगर निगम की एक खतरनाक बिल्डिंग में नगर निगम के मलेरिया विभाग का कार्यालय चल रहा है।
आम आदमी पार्टी के पार्षद विकास गोयल ने कहा कि नगर निगम ने खतरनाक मकानों का सर्वे करने में भारी लापरवाही बरती गई है। नगर निगम के अधिकारियों ने सर्वें के नाम पर खानापूर्ति की है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में खतरनाक भवन मौजूद हैं। उनकी तरह भाजपा के कई पार्षदों ने विभिन्न इलाकों में खतरनाक भवन होने की पुष्टि की। वहीं, कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी भवन खतरनाक घोषित करने में मनमानी कर रहे हैं। वह जर्जर भवनों को खतरनाक घोषित नहीं करते हैं और अच्छी स्थिति वाले भवनों को खतरनाक घोषित कर देते हैं।
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मिड-डे मील वितरण में हो रहा है घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में घोटाला हो रहा है। नगर निगम की मानें तो वह तीन लाख 28 हजार बच्चों को प्रतिदिन मिड-डे मील दे रही है, जबकि उनके रिकार्ड के मुताबिक स्कूलों में दो लाख 78 हजार बच्चेे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस बारे में बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में चर्चा के दौरान मालूम हुआ।
बैठक में करीब-करीब सभी पार्षदों ने मिड-डे मील की वितरण व्यवस्था और गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। बैठक में कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने अधिकारियों से पूछा कि करीब 50 हजार छात्रों का मिड-डे मील किस जगह वितरित हो रहा है। इस दौरान अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि मिड-डे मील वितरित करने वाली संस्थाओं की रसोई व खाने की गुणवत्ता जांच करने में भेदभाव किया जा रहा है।
बैठक में भाजपा के कई पार्षदों और आम आदमी पार्टी के विकास गोयल ने स्कूलों में शिक्षा की दयनीय स्थिति व उसके गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई। वहीं स्थायी समिति की अध्यक्ष वीना विरमानी ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
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हो सकती हैं बिल्डिंग गिरने की घटना
- सर्वे में खानापूर्ति करने का पार्षदों ने लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीआर और दक्षिण दिल्ली नगर निगम के इलाके में बिल्डिंग गिरने की घटनाएं होने जैसे हादसे उत्तरी दिल्ली नगर निगम इलाके में होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि नगर निगम ने खतरनाक हो चुके मकानों का पता लगाने का सर्वे सही ढंग से नहीं किया। नगर निगम ने सर्वे के नाम पर खानापूर्ति की है। इसका खुलासा नगर निगम में विपक्षी दलों के पार्षदों ने ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष भाजपा के पार्षदों ने भी किया।
नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में बुधवार को खतरनाक बिल्डिंग के मुद्दे पर चर्चा हुई। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि नरेला जोन के खेड़ा कलां गांव के अलावा उनको दो ही बिल्डिंग पुरानी दिल्ली में खतरनाक मिलीं। उनके इस तर्क पर भाजपा की पूनम पराशर ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुबारिकपुर वार्ड में नगर निगम की एक खतरनाक बिल्डिंग में नगर निगम के मलेरिया विभाग का कार्यालय चल रहा है।
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आम आदमी पार्टी के पार्षद विकास गोयल ने कहा कि नगर निगम ने खतरनाक मकानों का सर्वे करने में भारी लापरवाही बरती गई है। नगर निगम के अधिकारियों ने सर्वें के नाम पर खानापूर्ति की है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में खतरनाक भवन मौजूद हैं। उनकी तरह भाजपा के कई पार्षदों ने विभिन्न इलाकों में खतरनाक भवन होने की पुष्टि की। वहीं, कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी भवन खतरनाक घोषित करने में मनमानी कर रहे हैं। वह जर्जर भवनों को खतरनाक घोषित नहीं करते हैं और अच्छी स्थिति वाले भवनों को खतरनाक घोषित कर देते हैं।
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मिड-डे मील वितरण में हो रहा है घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में घोटाला हो रहा है। नगर निगम की मानें तो वह तीन लाख 28 हजार बच्चों को प्रतिदिन मिड-डे मील दे रही है, जबकि उनके रिकार्ड के मुताबिक स्कूलों में दो लाख 78 हजार बच्चेे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस बारे में बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में चर्चा के दौरान मालूम हुआ।
बैठक में करीब-करीब सभी पार्षदों ने मिड-डे मील की वितरण व्यवस्था और गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। बैठक में कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने अधिकारियों से पूछा कि करीब 50 हजार छात्रों का मिड-डे मील किस जगह वितरित हो रहा है। इस दौरान अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि मिड-डे मील वितरित करने वाली संस्थाओं की रसोई व खाने की गुणवत्ता जांच करने में भेदभाव किया जा रहा है।
बैठक में भाजपा के कई पार्षदों और आम आदमी पार्टी के विकास गोयल ने स्कूलों में शिक्षा की दयनीय स्थिति व उसके गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई। वहीं स्थायी समिति की अध्यक्ष वीना विरमानी ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।