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पटाखे
Updated Tue, 14 Aug 2018 10:36 PM IST
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‘पटाखों पर पाबंदी से पहले आर्थिक व स्वास्थ्य पहलुओं को देखना होगा’
एजेंसी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पटाखों पर पाबंदी लगाने से पहले पटाखा निर्माताओं की रोजी-रोटी के मौलिक अधिकार और 1.3 अरब आबादी के स्वास्थ्य सहित सभी पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरे देश में प्रतिबंध लगाने से पहले संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार और अन्य पहलुओं में संतुलन बनाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने केंद्र सरकार से प्रदूषण नियंत्रण के उपाय और पटाखों के लोगों पर व्यापक प्रभाव के बारे में विस्तृत हलफनामा देने को कहा है। इससे पहले के सरकारी हलफनामे में कहा गया है कि तमिलनाडु में 1750 पटाखा कारखाने हैं, जिनसे 5000 परिवार सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। देश में पटाखों का 6000 करोड़ रुपये का कारोबार है।
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एजेंसी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पटाखों पर पाबंदी लगाने से पहले पटाखा निर्माताओं की रोजी-रोटी के मौलिक अधिकार और 1.3 अरब आबादी के स्वास्थ्य सहित सभी पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरे देश में प्रतिबंध लगाने से पहले संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार और अन्य पहलुओं में संतुलन बनाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने केंद्र सरकार से प्रदूषण नियंत्रण के उपाय और पटाखों के लोगों पर व्यापक प्रभाव के बारे में विस्तृत हलफनामा देने को कहा है। इससे पहले के सरकारी हलफनामे में कहा गया है कि तमिलनाडु में 1750 पटाखा कारखाने हैं, जिनसे 5000 परिवार सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। देश में पटाखों का 6000 करोड़ रुपये का कारोबार है।
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