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अवैध दुकानों को कौन तोड़े
Updated Tue, 02 Oct 2018 02:52 AM IST
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मीट की अवैध दुकानों पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
पिछले महीने गोहत्या के बाद अवैध मार्केट का पता चला था
दुकानें ध्वस्त करने में प्राधिकरण और प्रशासन हाथ खींच रहे
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। मीट कारोबारियों द्वारा गोवध करने के बाद पुलिस ने संबंधित दुकानों को ध्वस्त करने के लिए प्राधिकरण को पत्र लिखा था, मगर दुकानों को ध्वस्त करने में प्राधिकरण और प्रशासन दोनों हाथ पीछे खींच रहे हैं। इससे बिना लाइसेंस के चल रही मीट की दुकानों को ध्वस्त नहीं किया जा सका है। दोनों विभाग एक-दूसरे का मामला बता रहे हैं।
दरअसल, 6 सितंबर को गेझा गांव में पशुओं के अवशेष कूड़े में मिले थे। पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत पर इसमें मीट कारोबारियों की संलिप्तता पाई थी और कई लोगों पर मामला दर्ज कराया था। 5 लोगों को गिरफ्तार करके मीट की 7 दुकानों को सील कर दिया गया था। उसी समय फेज-दो पुलिस ने प्राधिकरण को पत्र लिखा था कि यह गेझा गांव में खसरा संख्या-311 पर बनी हुई अवैध इमारत है, मगर प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अमर उजाला ने जब प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछा, तो उन्होंने बताया कि गेझा का खसरा नंबर 311 ग्राम समाज के नाम है, जिसके चलते राजस्व प्रशासन का कार्य है कि वहां से उसे हटवाए। यदि संसाधन की आवश्यकता है तो वह प्राधिकरण मुहैया करा देगा, मगर पहल राजस्व प्रशासन को ही करनी होगी।
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उधर, प्रशासनिक अधिकारियों से जब बात की गई, तो उन्होंने बताया कि अभी तक वह इसे प्राधिकरण की जमीन मान रहे थे। यदि ग्राम समाज की जमीन है तो उस पर से अतिक्रमण को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की ओर से प्राधिकरण को पत्र लिख दिया गया था कि मीट कारोबारियों को गोहत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जो दुकानें बनी हैं वह अवैध हैं, इसलिए उनको ध्वस्त कराया जाए। इसके बाद कोई पत्राचार नहीं हुआ है। यदि प्राधिकरण या प्रशासन को दुकानें ध्वस्त करनी है तो वह पुलिस के साथ मौके पर पहुंच जाएंगे।
-श्वेताभ पांडेय, सीओ-तृतीय
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पिछले महीने गोहत्या के बाद अवैध मार्केट का पता चला था
दुकानें ध्वस्त करने में प्राधिकरण और प्रशासन हाथ खींच रहे
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। मीट कारोबारियों द्वारा गोवध करने के बाद पुलिस ने संबंधित दुकानों को ध्वस्त करने के लिए प्राधिकरण को पत्र लिखा था, मगर दुकानों को ध्वस्त करने में प्राधिकरण और प्रशासन दोनों हाथ पीछे खींच रहे हैं। इससे बिना लाइसेंस के चल रही मीट की दुकानों को ध्वस्त नहीं किया जा सका है। दोनों विभाग एक-दूसरे का मामला बता रहे हैं।
दरअसल, 6 सितंबर को गेझा गांव में पशुओं के अवशेष कूड़े में मिले थे। पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत पर इसमें मीट कारोबारियों की संलिप्तता पाई थी और कई लोगों पर मामला दर्ज कराया था। 5 लोगों को गिरफ्तार करके मीट की 7 दुकानों को सील कर दिया गया था। उसी समय फेज-दो पुलिस ने प्राधिकरण को पत्र लिखा था कि यह गेझा गांव में खसरा संख्या-311 पर बनी हुई अवैध इमारत है, मगर प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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अमर उजाला ने जब प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछा, तो उन्होंने बताया कि गेझा का खसरा नंबर 311 ग्राम समाज के नाम है, जिसके चलते राजस्व प्रशासन का कार्य है कि वहां से उसे हटवाए। यदि संसाधन की आवश्यकता है तो वह प्राधिकरण मुहैया करा देगा, मगर पहल राजस्व प्रशासन को ही करनी होगी।
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उधर, प्रशासनिक अधिकारियों से जब बात की गई, तो उन्होंने बताया कि अभी तक वह इसे प्राधिकरण की जमीन मान रहे थे। यदि ग्राम समाज की जमीन है तो उस पर से अतिक्रमण को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की ओर से प्राधिकरण को पत्र लिख दिया गया था कि मीट कारोबारियों को गोहत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जो दुकानें बनी हैं वह अवैध हैं, इसलिए उनको ध्वस्त कराया जाए। इसके बाद कोई पत्राचार नहीं हुआ है। यदि प्राधिकरण या प्रशासन को दुकानें ध्वस्त करनी है तो वह पुलिस के साथ मौके पर पहुंच जाएंगे।
-श्वेताभ पांडेय, सीओ-तृतीय