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रजिस्ट्री में अनियमितता पर दो नायब तहसीलदार पर कार्रवाई के आदेश
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:19 PM IST
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रजिस्ट्री में अनियमितता पर दो नायब तहसीलदार पर कार्रवाई के आदेश
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को गुरुग्राम जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान रजिस्ट्री कार्य में अनियमितताएं बरतने के आरोप में दो नायब तहसीलदारों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इनमें से सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार अयूब खान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तथा दूसरे सेवारत नायब तहसीलदार रुपिंद्र को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उनके समक्ष 20 समस्याएं रखी गई थीं। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया। 16 अनधिकृत रजिस्ट्री की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा बीपीएल को अलॉट किए गए प्लॉट अथवा फ्लैटों की अनधिकृत रूप से रजिस्ट्री करने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ईडब्ल्यूएस अथवा बीपीएल अलॉटी को आवंटित फ्लैट अथवा प्लॉट आवंटन के पांच साल तक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है और न ही उनकी रजिस्ट्री हो सकती है, लेकिन गुरुग्राम तथा बादशाहपुर के तत्कालीन नायब तहसीलदारों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए रजिस्ट्री कर दी।
शिकायतकर्ता द्वारा उदाहरण के तौर पर ऐसी 11 वसीका की रजिस्ट्री अथवा ट्रांसफर के कागजात पेश किए गए थे। इस मामले की जांच में शिकायत को सही करार देते हुए दोनों आरोपित नायब तहसीलदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की थी। इन अनधिकृत रजिस्ट्री के अलावा भी शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के समक्ष 16 रजिस्ट्री प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि अब भी गुरुग्राम जिले में इस प्रकार की रजिस्ट्री की जा रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
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बिल्डरों द्वारा अलॉटी के पक्ष में कन्वेयंस डीड करवाने के नाम पर 50 प्रतिशत शुल्क लिए जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय का इस मामले में निर्णय नहीं आता, तब तक अलॉटी ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम द्वारा निर्धारित 15 हजार रुपये का ही शुल्क बिल्डर द्वारा लिया जाएगा। इस बीच यदि नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग का कोई नया फैसला आता है तो वह लागू होगा। कन्वेयंस डीड के लिए शुल्क लेने के संबंध में सीआरईडीएआई (कंफेडेरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामला दायर किया हुआ है।
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गुरुग्राम। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को गुरुग्राम जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान रजिस्ट्री कार्य में अनियमितताएं बरतने के आरोप में दो नायब तहसीलदारों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इनमें से सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार अयूब खान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तथा दूसरे सेवारत नायब तहसीलदार रुपिंद्र को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उनके समक्ष 20 समस्याएं रखी गई थीं। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया। 16 अनधिकृत रजिस्ट्री की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा बीपीएल को अलॉट किए गए प्लॉट अथवा फ्लैटों की अनधिकृत रूप से रजिस्ट्री करने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ईडब्ल्यूएस अथवा बीपीएल अलॉटी को आवंटित फ्लैट अथवा प्लॉट आवंटन के पांच साल तक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है और न ही उनकी रजिस्ट्री हो सकती है, लेकिन गुरुग्राम तथा बादशाहपुर के तत्कालीन नायब तहसीलदारों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए रजिस्ट्री कर दी।
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शिकायतकर्ता द्वारा उदाहरण के तौर पर ऐसी 11 वसीका की रजिस्ट्री अथवा ट्रांसफर के कागजात पेश किए गए थे। इस मामले की जांच में शिकायत को सही करार देते हुए दोनों आरोपित नायब तहसीलदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की थी। इन अनधिकृत रजिस्ट्री के अलावा भी शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के समक्ष 16 रजिस्ट्री प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि अब भी गुरुग्राम जिले में इस प्रकार की रजिस्ट्री की जा रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
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बिल्डरों द्वारा अलॉटी के पक्ष में कन्वेयंस डीड करवाने के नाम पर 50 प्रतिशत शुल्क लिए जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय का इस मामले में निर्णय नहीं आता, तब तक अलॉटी ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम द्वारा निर्धारित 15 हजार रुपये का ही शुल्क बिल्डर द्वारा लिया जाएगा। इस बीच यदि नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग का कोई नया फैसला आता है तो वह लागू होगा। कन्वेयंस डीड के लिए शुल्क लेने के संबंध में सीआरईडीएआई (कंफेडेरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामला दायर किया हुआ है।