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नोएडा में गर्भवती की मौत पर डीएम की जांच में सभी 8 अस्पताल दोषी, भर्ती न करने के लिए बनाया बहाना

Wed, 10 Jun 2020 10:50 AM IST
पूजा त्रिपाठी माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 10 Jun 2020 10:50 AM IST
सार

  • जिलाधिकारी ने की जिला अस्पताल की सीएमएस की अन्य जगह पर तबादले की सिफारिश
  • ईएसआई के स्टाफ ने उपचार करने के बजाय जिला अस्पताल के बाहर एंबुलेंस से मरीज को छोड़ा
  • जिला अस्पताल की सीएमएस, ईएसआई के निदेशक ने बरती लापरवाही

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Noida pregnant woman death dm probe says all 8 hospitals convict made excuses to not admit her
गौतमबुद्ध नगर के डीएम सुहास एलवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा से सटे खोड़ा के आजाद विहार निवासी गर्भवती की मौत के मामले में सिस्टम किस कदर गैर जिम्मेदार रहा। इसकी पोल जिलाधिकारी की ओर से कराई जांच में खुलकर सामने आई है।

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जांच में जिला अस्पताल की सीएमएस, ईएसआई के निदेशक व स्टाफ, जिम्स का स्टाफ और अन्य पांच निजी अस्पताल की लापरवाही मिली है। जिलाधिकारी ने सभी को जांच रिपोर्ट में दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है। निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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शुक्रवार सुबह 6 बजे खोड़ा निवासी 8 माह की गर्भवती महिला नीलम को परिजन तबीयत बिगड़ने पर ईएसआई, जिला अस्पताल, शिवालिक, जेपी, फोर्टिस, शारदा, जिम्स, गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल ले गए।
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आरोप है कि सभी जगह इलाज न मिलने पर रात को ही नीलम और गर्भस्थ शिशु ने दम तोड़ दिया। इसके बाद जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त मुनींद्र नाथ उपाध्याय और सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी को जांच सौंप दी। जांच टीम ने दो दिन तक विभिन्न अस्पतालों में दस्तावेज जुटाए और कर्मियों के बयान दर्ज किए।

अब जिला प्रशासन ने गर्भवती की मौत मामले में बरती गई लापरवाही सार्वजनिक की है। जांच आख्या में सर्वाधिक खराब रवैया ईएसआई अस्पताल के स्टाफ और अफसरों  का सामने आया है।

रिपोर्ट में लिखा है कि सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल में सारी सुविधाएं व वेंटिलेटर की उपलब्धता के बावजूद नीलम का इलाज न कर जिम्स रेफर कर एंबुलेंस से जिला अस्पताल के बाहर ही छोड़ दिया गया।

जिला अस्पताल के किसी अफसर-कर्मचारी से रिसीव तक नहीं कराया। डीएम ने अस्पताल के निदेशक, इलाज व रेफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के लिए प्रमुख सचिव श्रम उत्तर प्रदेश शासन, सचिव श्रम भारत सरकार, डीजी राज्य कर्मचारी जीवन बीमा निगम से की है।

वहीं, जिला अस्पताल की जांच में सामने आया है कि यदि मरीज वहां इलाज नहीं करा सकता था तो उसकी जिम्मेदारी संविदा कर्मी पर न होकर किसी जिम्मेदार अफसर पर होनी थी। उन कर्मचारियों ने अफसरों को बिना बताए ही मरीज को वापस भेज दिया। इसके अलावा अन्य कई मामले भी सीएमएस के गले की फांस बने हैं।

जिलाधिकारी ने सभी को आधार बनाते हुए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश को सीएमएस का तबादला अन्य स्थान पर करने केलिए लिख दिया है। साथ ही, जांच में गाजियाबाद के निजी अस्पताल की लापरवाही भी सामने आई है। इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने गाजियाबाद के डीएम को लिखा है।

निजी अस्पतालों के खिलाफ गठित होगी कमेटी, होगी एफआईआर

डीएम ने रिपोर्ट में लिखा है कि विभिन्न निजी अस्पतालों में जाने के बावजूद वहां बेड उपलब्ध न होने का बहाना बना मरीज को वापस भेज दिया गया। इस कारण समय पर इलाज न मिलने से गर्भवती की मौत हो गई। जांच में निजी अस्पतालों में तैनात अफसर-कर्मचारी को दोषी माना है।

रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम ने सीएमओ को अग्रिम कार्रवाई के लिए लिखा है कि सभी अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार चिकित्सीय तकनीकी समिति गठित की जाए। उसी में जांच के आधार पर अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।

जिम्स के निदेशक करेंगे कार्रवाई
जांच में जिम्स की लापरवाही भी सामने आई है, लेकिन यहां डीएम ने शासन को किसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए नहीं लिखा है। डीएम ने लिखा है कि जिम्स में पहली बार मरीज को वापस कर दिया। बाद में लाने पर उसे भर्ती कर दिया। पहली बार भर्ती करने से मना करने के आधार पर जिम्स निदेशक संबंधित आरोपी अफसर-कर्मी पर कार्रवाई करेंगे।

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