{"_id":"6563dff1715b9779a4032413","slug":"noida-how-will-pollution-be-controlled-50-posts-vacant-2023-11-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida : आखिर कैसे होगा प्रदूषण पर नियंत्रण, 50% पद खाली, राज्यों को नोटिस भेजकर एनजीटी ने किया जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida : आखिर कैसे होगा प्रदूषण पर नियंत्रण, 50% पद खाली, राज्यों को नोटिस भेजकर एनजीटी ने किया जवाब तलब
Mon, 27 Nov 2023 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अतुल भारद्वाज, नोएडा
अतुल भारद्वाज, नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 27 Nov 2023 05:46 AM IST
सार
देश के कमोबेश सभी प्रदेशों और केंद्रित शासित राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बने बोर्ड और कमेटियों में 50 फीसदी से अधिक पद खाली पड़े हैं। प्रदूषण की जांच के लिए बनीं प्रयोगशालाएं भी मानकों को पूरा नहीं करतीं। दो तिहाई से अधिक लैब को सक्षम एजेंसियों से प्रमाणित तक नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
Air Pollution
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक ओर प्रदूषण बेकाबू हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ देश के कमोबेश सभी प्रदेशों और केंद्रित शासित राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बने बोर्ड और कमेटियों में 50 फीसदी से अधिक पद खाली पड़े हैं। प्रदूषण की जांच के लिए बनीं प्रयोगशालाएं भी मानकों को पूरा नहीं करतीं। दो तिहाई से अधिक लैब को सक्षम एजेंसियों से प्रमाणित तक नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
प्रदूषण नियंत्रण की खराब हालत पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा यूपी, पंजाब, दिल्ली सहित 36 प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों को नोटिस जारी किया है। सभी राज्य सरकारों से ट्रिब्यूनल ने प्रशासनिक और तकनीकी पदों के अलावा प्रयोगशालाओं में मौजूद संसाधनों पर जवाब देने के लिए आदेश किया है।
विज्ञापन
एनजीटी ने इस हालात पर स्वत: संज्ञान लिया है। चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए सेंथिल वेल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट में बताएं कि संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा कमेटी और उनकी लैब में स्वीकृत स्टाफ और तैनाती के अलावा क्या संसाधन उनके पास उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
अत्यधिक प्रदूषण वाले हॉट-स्पॉट को चिह्नित करने के लिए किन उपकरणों और संसाधन की जरूरत है। इसके साथ ही पिछले दो वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 में मिले बजट और खर्च की जानकारी भी रिपोर्ट में देनी होगी। आठ सप्ताह में यह रिपोर्ट एनजीटी को देनी होगी। एनजीटी इस प्रकरण में दो फरवरी 2024 को सुनवाई करेगा।
कई राज्यों में आधे से भी कम कर्मचारी
एनजीटी का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार बोर्ड और कमेटियों में 11969 स्वीकृत पद हैं। इनमें से केवल 5877 पद पर ही तैनाती है। 6092 पद खाली पड़े हुए हैं। यूपी, गुजरात, बिहार, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, नागालैंड, सिक्किम जैसे राज्यों में तो 50 फीसदी से भी कम पर स्टाफ की तैनाती है।
लैब में भी 194 में केवल 12 को ईपीए और 41 को एनएबीएल से प्रमाणित हैं। यानी, 141 लैब एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के मुताबिक नहीं संचालित किए जा रहे हैं। कुछ राज्यों में तो कोई लैब ही मौजूद नहीं है।