नोएडा आग हादसा: मलबे के ढेर में मिले मानव अंग, फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठे सवाल
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नोएडा के सेक्टर-11 स्थित एक्सेल ग्रीन टेक प्राइवेट लिमिटेड में आग लगने के बाद देर रात तक पुलिस ने सर्च आपरेशन किया जो दिन चढ़ते ही एक बार फिर शुरू हो गया। सुबह करीब आठ बजे मानव अंग के कुछ हिस्से पुलिस को मिले।
एंबुलेंस के जरिये इन हिस्सों को मोर्चरी भेज दिया गया। यहां से सैंपल लेकर डीएनए जांच के लिए इन्हें भेजा जाएगा। वहीं, हादसे के बाद कंपनियों-भवनों के फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर भी सवाल उठे हैं। बुधवार को नोएडा के सेक्टर 11 स्थित एलईडी बल्ब बनाने वाली कंपनी में लगी आग में 6 लोगों की जलकर मौत हो गई।
हादसे में आग बुझाने के बाद कंपनी की सफाई शुरू की गई। पुलिस का कहना है कि आग बिल्डिंग के बेसमेंट से शुरू हुई। उस समय चौथी मंजिल पर काम कर रहे कंपनी के कर्मचारियों को इस बात का बिल्कुल अहसास नहीं था कि आग भीषण फैल जाएगी।
तेज धमाके के साथ पहले कांच फटा, इसके बाद आग तेजी से ट्रांसफार्मर की ओर बढ़ी। ग्राउंड फ्लोर पर खड़ी बाइक भी उसकी चपेट में आ गईं।
कंपनी में 12 लोग फंसे थे जिसमें दो लोग लिफ्ट में थे। इसमें से छह लोगों के शव मिल चुके हैं, जिसमें से दो की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों शव की हालत बेहद खराब है। ऐसे में बिना डीएनए जांच के कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
वहीं, दिल्ली की सुभद्रा कॉलोनी निवासी पवन शर्मा का अब भी कुछ पता नहीं चल सका है। पवन के परिजनों ने सेक्टर-24 में गुमशुदगी दर्ज कराई है। साथ ही, परिजन डीएनए के लिए पवन के दोनों बेटों के साथ कंपनी के पास ही भटक रहे हैं।
प्रतिमाह छह लाख रुपये देते थे किराया
मौके पर पहुंचे प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि 1980 में बिल्डिंग को अलाटमेंट लेटर दिया गया था। इसके बाद से तीन से चार बार बिल्डिंग को रिसेल किया जा चुका है। जबकि वर्तमान में कंपनी एसआरएस क्रिएशन नाम से अलॉट थी। बिल्डिंग को दो साल पहले ही तीन डायरेक्टरों ने किराया पर लिया था। इसके लिए वह प्रतिमाह छह लाख रुपये किराया देते थे।
कंपनी बॉयलाज संबंधित कोई खामी नहीं थी। फायर एनओसी भी थी। कंपनी को कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी जारी किया जा चुका था, लेकिन खामी प्राधिकरण, पुलिस व फायर विभाग की सामने आ रही है।
दरअसल, कंप्लीशन सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाता है जब बिल्डिंग में प्राधिकरण द्वारा मांगे गए सभी तथ्य पूर्ण हो खासकर सुरक्षा के मानक, लेकिन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद से आज तक दोबारा किसी भी अधिकारी ने कंपनी का निरीक्षण नहीं किया।
कंपनियों-भवनों के फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठे सवाल
दमकल विभाग के अफसरों ने पर आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार और भाई-भतीजों को ठेकेदार बना दिया है। जो कंपनी मालिक उनसे आग बुझाने के उपकरण नहीं लगवाते हैं, उनके सिस्टम मानक के अनुसार ने बताते हुए एनओसी नहीं दी जाती है। जो कंपनी मालिक फायर अफसरों के रिश्तेदारों से काम कराते हैं भले ही वह आधा-अधूरा काम करते हों, लेकिन उसे पास कर दिया जाता है।
सेक्टर-11 में ऐसी कई और कंपनियां हैं जिनमें 500 से 1000 श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग ने वहां पर अधूरे उपकरण लगे होने के बाद भी एनओसी दे रखी है।
यदि उन कंपनियों में इस तरह का हादसा हो गया तो हजारों लोगों की जान जा सकती है। वहां पर एक-दो नहीं बल्कि आधे से ज्यादा मानक अधूरे हैं।