उपचुनाव: हाथी की चाल से तय होगी हार-जीत
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नोएडा उपचुनाव में बसपा भाग नहीं ले रही है लेकिन ‘हाथी’ को खुली छूट दे दी है कि वह अपनी मनमर्जी से जहां चाहे जा सकता है। अब सवाल उठता है कि नोएडा विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले करीब पचास हजार बसपा वोट किधर जाएंगे। इन वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिए सभी पार्टियों में होड़ मची हुई है।
ये तय है कि इन वोटरों का ‘आशीर्वाद’ जिसे मिलेगा उसकी जीत आसान हो सकती है। गौरतलब है कि 2012 के विधानसभा के चुनाव में बसपा को 49,643 वोट मिले थे। भाजपा पहले नंबर पर थी, बसपा दूसरे स्थान पर रही थी।
नए परिसीमन के तहत गठित गौतमबुद्ध नगर सीट के लिए 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान पहला सांसद बनने का श्रेय बसपा से सुरेंद्र सिंह नागर को मिला था। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वह सपा में शामिल हो गए थे। पूर्व सांसद का मानना है कि उन्होंने दलितों के बीच रहकर काम किया था। पूरा विश्वास है कि चुनाव में सपा प्रत्याशी काजल शर्मा को ही दलित वोट मिलेंगे।
विधानसभा चुनाव के लिए घोषित किए जा चुके बसपा प्रत्याशी
भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र भाटी का कहना है कि पार्टी की नीति सबको जोड़कर चलने वाली है। लोकसभा में अपार सफलता दिलाने में हर वर्ग के वोटरों ने साथ दिया था। पिछली बसपा सरकार में उन्होंने खुद पार्टी के लिए काम किया था।
प्रदेश सरकार की कार्यशैली से यह बसपा समर्थक नाराज है, सभी की निगाहें भाजपा पर टिकी हुई हैं। इसलिए पार्टी प्रत्याशी विमला बाथम को दलित वोट अवश्य मिलेगा।
कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष कृपाराम शर्मा की मानें तो इस बार चुनाव में पार्टी प्रत्याशी राजेंद्र अवाना को ही बसपा का वोट मिलेगा। हाल ही में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों में भाजपा का ग्राफ गिरा है और कांग्रेस कापरंपरागत वोट वापस आ रहा है। प्रत्याशी का स्थानीय होना भी लाभ पहुंचाएगा।
उधर, वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए घोषित किए जा चुके बसपा प्रत्याशी बिजेंद्र अवाना ने बताया कि उपचुनाव में वोट डालने के लिए पार्टी की तरफ से कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। बसपा वोटर अपनी मर्जी से ही वोट देगा, कोई दबाव नहीं है।