वोटरों के झटके से नेताओं की नांव मझधार में फंसी
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उपचुनाव में इस बार वोटरों ने प्रत्याशियों को मंझधार में छोड़ दिया है। भले ही प्रत्याशी यह कह रहे हों कि उनकी जीत हो रही है लेकिन हकीकत यह है कि वोटरों ने अपनी थाह इस बार किसी को नहीं दी है।
दरअसल, नोएडा विधानसभा के उपचुनाव में एक बात और देखी गई कि युवाओं में जोश नहीं दिख। लोग वोट डालने क्यों नहीं पहुंचे, इसका एक कारण नहीं है, बल्कि तमाम ऐसे बिंदु रहे जिससे वोटरों का मन ही घर से निकलने को नहीं हुआ।
इसका सबसे प्रमुख कारण यह रहा कि प्रत्याशी इस बार मतदाताओं तक अपना संदेश ही नहीं पहुंचा पाए। वोटर से जब किसी ने कहा ही नहीं कि वोट देना है तो वह क्यों देता।
इसके अलावा कई फैक्टरी मालिकों को तब पता चला कि नोएडा में चुनाव हो रहा है, जब उनके यहां श्रम विभाग की तरफ से छुट्टी होने की जानकारी पहुंची।
रविवार को जिला निर्वाचन विभाग ने प्रत्येक बूथ पर पड़े वोटों की जानकारी प्रत्याशी को दे दी लेकिन अब इस पर विचार-विमर्श होता रहा कि किस बूथ पर किसको कितने वोट मिले। आकलन तो तीनों प्रत्याशियों ने किया है लेकिन संशय सभी को है।
वोटरों का मन नहीं टटोल पा रहे रणनीतिकार
मतदताओं का रुझान किसी भी प्रत्याशी की तरफ नहीं दिखा। करीब 10 से 15 फीसदी युवा वोटर ऐसा था जो किसी विशेष बदलाव के इरादे से ही मतदान करता है, जो इस बार वह गायब रहा।
प्रत्याशी की मीडिया से दूरी क्यों
पूरे चुनाव में एक पार्टी की प्रत्याशी ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। कई बार मीडिया के लोग उनके घर पहुंचे और बात करने की कोशिश की लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली। चुनाव प्रचार में भी परिवार के लोग ही ज्यादातर दिखे। प्रत्याशी की चुप्पी भी लोगों को समझ में नहीं आई।
अन्यथा देखा जाता है कि जब भी कोई राजनीति में कदम रखता है तो वह सबसे पहले मीडिया के सामने ही अपनी बात रखता है। जब टिकट घोषित हुआ था तो उस वक्त जरूर मीडिया से रूबरू कराया गया था लेकिन जवाब पास में बैठे लोगों ने ही ज्यादातर दिए थे।