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Greater Noida: बिल्डर और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से 100 करोड़ की ठगी, एसटीएफ ने आठ लोगों को किया गिरफ्तार
Sat, 06 Dec 2025 06:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 06 Dec 2025 06:56 AM IST
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एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने बिल्डर प्रोजेक्ट में निवेश और फ्लैट खरीदने के नाम पर लोन कराकर 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का खुलासा किया है। टीम ने गिरोह के सरगना रामकुमार सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक सेक्टर से जुड़े प्रशिक्षित पेशेवर, कंपनी सेक्रेटरी, एमबीए और विधि की पढ़ाई कर चुके सदस्य शामिल हैं। ये बिल्डर और बैंक कर्मियों से मिलीभगत करके वारदात को अंजाम देते थे।
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एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि एचडीएफसी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने फर्जी प्रोफाइल पर जारी लोन की शिकायत की थी। इसकी जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। बृहस्पतिवार दोपहर सूरजपुर थाना क्षेत्र से गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि ये कई राज्यों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों की संपत्तियों पर करोड़ों रुपये का होम लोन करा चुके हैं।
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गिरोह के बदमाश
टीम ने इंदिरापुरम में रहने वाले गिरोह के सरगना रामकुमार समेत साहिबाबाद निवासी अनुज यादव, दिल्ली निवासी नितिन जैन व अशोक उर्फ दीपक, झारखंड निवासी मोहम्मद वसी, बिहार निवासी शमशाद आलम, गुरुग्राम के इंद्रकुमार कर्माकर, संभल निवासी ताहिर हुसैन को गिरफ्तार किया है। इनसे 126 बैंक चेकबुक-पासबुक, 170 डेबिट कार्ड, 45 आधार कार्ड, 27 पैन कार्ड, 5 वोटर आईडी, 26 मोबाइल, 3 लैपटॉप, 3 लग्जरी गाड़ियां और फर्जी रजिस्ट्री व एग्रीमेंट दस्तावेज बरामद किए हैं। टीम ने गिरोह से जुड़े 220 से अधिक बैंक खातों को भी फ्रीज कराया है।
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ऐसे करते थे जालसाजी
आरोपी लोन लेने से पहले फर्जी बिल्डर, प्रोजेक्ट, निवेशक की प्रोफाइल बनाते थे फिर बैंक में जाकर निवेश या घर खरीदने के लिए लोन कराते थे। रकम खाते में आने के बाद गायब हो जाते थे। बिल्डरों से साठगांठ करके भी लोन कराते थे। आरोपी फर्जी नाम-पते से फ्लैट और मकानों का लोन प्रोसेसिंग कराते थे। कई बार लोन फर्जी फ्लैट या अस्तित्वहीन संपत्तियों के नाम पर भी पास करा लेते थे। गिरोह का नेटवर्क कई शहरों में फैला है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों की जानकारी जुटाते थे फिर फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार करके अलग-अलग बैंकों में दस्तावेज जमा कराते थे। अधिकतर मामलों में बिल्डरों की मिलीभगत से लोन अप्रूवल प्रक्रिया को आसान बनाते थे। लोन की रकम आने के बाद व्यक्ति या प्रोफाइल हमेशा के लिए गायब हो जाती थी।
गिरोह का सदस्य पहले से जेल में है बंद
गिरोह का बदमाश अनिल शर्मा को मार्च में दिल्ली की ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था। उसने एलआईसी हाउसिंग से 1.25 करोड़ रुपये का फर्जी होम लोन लेने के लिए नकली बैनामा कागज बनवाया था। यह मामला वर्तमान गैंग कनेक्शन से भी जुड़ा पाया गया है। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि गिरोह की जड़ें नोएडा, लखनऊ, वाराणसी, हरिद्वार, चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम तक फैली हैं। कई बिल्डरों पर भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं। गिरोह ने 20 से अधिक शेल कंपनियां फर्जी व्यक्तियों के नाम से खोल रखी थीं। इन कंपनियों का उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त धन की निकासी करने और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था।
मृत महिला की संपत्ति पर 4.8 करोड़ का फर्जी लोन
गिरोह ने दिल्ली स्थित रतनावासुदेवा नाम की महिला की जगह शाहिदा अहमद को खड़ा किया और उनकी संपत्ति को सना उल्लाह अंसारी के नाम करा दिया। रतनावासुदेवा की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, जालसाजों ने इस संपत्ति पर 4.8 करोड़ रुपये का होम लोन भी पास करा लिया।
कोई बैंकिंग प्रोसेस संभालता था कुछ बिल्डर से करते थे संपर्क
रामकुमार एमबीए, मोहम्मद वसी कंपनी सेक्रेटरी (सीएस), एमबीए व एलएलबी पास है। वसी कई वर्षों से एक्सचेंजर कंपनी में लीगल एंड रिस्क मैनेजर के पद पर कार्य कर रहा है। अन्य आरोपी भी बैंकिंग और फाइनेंस प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित हैं। सभी आरोपी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर फर्जी प्रोफाइल के सहारे करोड़ों रुपये ठगते थे। सबके काम बंटे थे। कोई दस्तावेज तैयार करता था। कोई बैंकिंग प्रोसेस संभालता था तो कोई फर्जी खरीदार तैयार करने या बिल्डरों से संपर्क कराने का काम करता था।