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Delhi : एमसीडी के स्कूलों में 31 साल से नहीं हुई खेल शिक्षकों की भर्ती, संगीत और कला संसार भी कर रहा है इंतजार

Sat, 30 Dec 2023 07:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 30 Dec 2023 07:07 AM IST
सार

सालों से सामान्य शिक्षकों के भरोसे खेल शिक्षकों का काम चल रहा। नियमानुसार जितने कुल शिक्षक हैं, इनका दस फीसदी खेल शिक्षकों की भर्ती अनिवार्य रूप से होनी चाहिए थी। लेकिन सालों से खेल शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।

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No recruitment of sports teachers in MCD schools for 31 years
एमसी़डी स्कूल

विस्तार

एमसीडी स्कूलों में 31 साल से एक भी खेल शिक्षक की भर्ती नहीं हुई। सालों से सामान्य शिक्षकों के भरोसे खेल शिक्षकों का काम चल रहा। नियमानुसार जितने कुल शिक्षक हैं, इनका दस फीसदी खेल शिक्षकों की भर्ती अनिवार्य रूप से होनी चाहिए थी। लेकिन सालों से खेल शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं, संगीत और चित्रकला के शिक्षकों की हालत भी कुछ इसी प्रकार है, इनके पद भी सालों से खाली पड़े हैं। सामान्य शिक्षकों के भरोसे ही इनका काम भी चल रहा है।

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खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत हर स्कूल में एक खेल शिक्षक अनिवार्य रूप से होने चाहिए। लिहाजा निगम के कुल 1536 स्कूलों में इतने ही खेल शिक्षकों की भर्ती होनी थी। यदि यहां खेलो इंडिया योजना को दरकिनार कर दें तो निगम ने 1976 में स्कूली छात्रों को खेल व शारीरिक कौशल सिखाने के लिए अपना ही एक कानून पास किया था, जिसके मुताबिक इनके पास जितने सामान्य शिक्षक हैं, इसका 10 फीसदी खेल शिक्षक स्कूलों में भर्ती होने चाहिए थे। लेकिन निगम अपने ही बनाए नियम को लागू नहीं कर पाया। आखिरी बार निगम स्कूलों में 1992 में खेल शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद केवल करुणामूलक आधार पर 11 खेल शिक्षक भर्ती किए गए।
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84 पद खाली 
निगम के शिक्षा विभाग के मुताबिक एमसीडी स्कूलों में मौजूदा समय कुल 50 खेल शिक्षक हैं और इनके 84 पद खाली पड़े हैं। फिलहाल निगम ने कागजों में इतने ही पद खाली दर्ज किए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 1992 तक भर्ती हुए ज्यादातर शिक्षक अगले कुछ सालों में रिटायर हो जाएंगे।
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ऐसे कैसे खेल में अव्वल बनेंगे बच्चे
सालों से सामान्य शिक्षकों के भरोसे बच्चों की खेल व शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं चल रहीं। निगम स्कूल की एक खेल शिक्षक ने बताया कि वे खेल शिक्षक हैं, क्योंकि उन्होंने इसी विषय की पढ़ाई की है। सामान्य शिक्षकों को खेल व शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों की जानकारी नहीं है, लेकिन स्कूल में खेल शिक्षक नहीं होने से बच्चों को खिलाना उनकी मजबूरी है। इस दौरान इन्हें सामान्य कक्षाएं छोड़नी पड़ती हैं। 

खेल शिक्षक प्रमोट कर बनाए स्कूल इंस्पेक्टर
निगम ने 2006 में कानून पास किया कि खेल शिक्षक 13 साल पढ़ाने के बाद प्रमोट कर स्कूल इंस्पेक्टर नियुक्त कर दिए जाएंगे। लुक आफ्टर की नीति पर अबतक ऐसे कुल 16 खेल शिक्षकों को स्कूल इंस्पेक्टर नियुक्त किया गया है। नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर एक स्कूल इंस्पेक्टर ने बताया कि निगम ने इन्हें स्कूल इंस्पेक्टर का पदभार तो दे दिया। लेकिन सालों से अधिकतर स्कूल इंस्पेक्टर को खेल शिक्षक का ग्रेड पे दिया जा रहा।


निगम की आर्थिक स्थिति कई साल तक रही खराब 
निगम की आर्थिक स्थिति बीते कई साल लगातार खराब रही। इस दौरान प्राइमरी स्कूलों की स्थिति बिगड़ती गई। शिक्षकों के खाली पद नहीं भरे गए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक निगम के एकीकरण के बाद स्कूलों के आधारभूत ढांचे में सुधार हुआ है। अब शिक्षकों की भर्ती पर भी निगम आयुक्त को विचार करना चाहिए।

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