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दिल्लीः कब्रिस्तान में न मिल रही जेसीबी, न पीपीई, हर दिन हो रहे झगड़े

Mon, 11 May 2020 06:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली 
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 11 May 2020 06:23 AM IST
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No JCB, no PPE, fights happening every day in the cemetery in delhi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

इन दिनों कोविड से जुड़े शवों का अंतिम संस्कार कब्रिस्तान और श्मशान घाट पर किया जा रहा है। इनके कर्मचारियों को न तो पीपीई किट मिल रही है और न ही उन्हें किसी भी प्रकार की अन्य राहत मिल रही है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर मरने वाले के परिजनों को उठाना पड़ रहा है।

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 कब्रिस्तान में शव दफनाने आने वालों को छह हजार रुपये जेसीबी और 500 से हजार रुपये तक पीपीई पर खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, अंतिम संस्कार कराने श्मशान घाट पहुंच रहे लोगों को पीपीई किट या उसके एवज में राशि देनी पड़ रही है। 
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आईटीओ स्थित जदीद कब्रिस्तान अल इस्लाम के सुपरवाइजर शमीम बताते हैं कि स्वास्थ्य कर्मचारियों और पुलिस के अलावा वे भी कोरोना से सीधे तौर पर लड़ रहे हैं। हर दिन कोविड से जुड़े औसतन चार-पांच शवों को सुपुर्द-ए-खाक कराना पड़ रहा है। उनके पास पीपीई किट का इंतजाम तो ट्रस्ट से हो जाता है, लेकिन सरकार को इन कर्मचारियों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, ताकि ये कोरोना की चपेट में आते हैं तो इन्हें या इनके परिवार को मदद मिल सके। 
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शमीम ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से जेसीबी की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में जेसीबी पटपडग़ंज से आती है तो वह छह हजार रुपये लेती है। दो दिन पहले ही एक मृतक के परिजनों ने काफी हंगामा करते हुए मोबाइल से वीडियो बनाया और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप तक लगा दिए। ऐसी स्थिति में वे कैसे काम कर सकते हैं? 


दूसरी ओर, निगम बोध घाट स्थित श्मशान स्थल के एक कर्मचारी ने बताया कि कोविड प्रबंधन के तहत यहां आने वाले शवों का सीएनजी से अंतिम संस्कार किया जाता है। परिजनों को दूर रखा जाता है। उनके पास पीपीई किट नहीं है, इसलिए परिजनों से ही मंगाते हैं।

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