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कटारा हत्याकांड के दोषियों को नही होगी फांसी

Mon, 16 Nov 2015 09:58 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 16 Nov 2015 09:58 PM IST
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Nitish Katara murder case convicts will not be executed.

नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए विकास और विशाल यादव को फांसी की सजा देने की दिल्ली सरकार की याचिका को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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इससे पहले नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दोषियों को फांसी देने की गुहार की थी। हाईकोर्ट ने दोनों को 30-30 साल कैद की सजा सुनाई थी।
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न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति आर भानूमति की पीठ ने इस हत्याकांड को ऑनर किलिंग मानने से भी इनकार कर दिया है। पीठ ने इसको महज हत्या का मामला बताया।
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पीठ ने कहा कि हत्या पूर्व नियोजित हो सकती है लेकिन जघन्य हत्या नहीं है। पीठ ने कहा कि हर हत्या पूर्व नियोजित होती है। नीतीश को जबरन साथ ले जाया गया था।

कोर्ट ने केस को नहीं माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर

Nitish Katara murder case convicts will not be executed.

नीलम कटारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। हत्या सुनियोजित तरीके से की गई।

पहले नीतीश को जबरन साथ ले जाया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। इतना ही हत्या के बाद शव को जला भी दिया गया। लेकिन पीठ ने इस रेयरेस्ट ऑफ रेयर का मामला मानने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा कि नीतीश की मौत हथौड़े के एक घातक वार से हुई और जहां तक शव को जलाने की बात है तो वह हत्या के बाद किया गया।

सूबत को खत्म करने के लिए ऐसा किया गया था। लिहाजा अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला मानने से इनकार कर दिया था। साल्वे ने पीठ को यह भी समझाने का प्रयास किया कि यह मामला ऑनर किलिंग का है।

'भारती और नीतीश का साथ डांस करना वजह'

Nitish Katara murder case convicts will not be executed.

लेकिन पीठ ने इसे भी मानने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि भारती यादव अपनी बहन की शादी का निमंत्रण देने नीतीश के घर गई थी।

मतलब है कि दोनों घरवालो को इन दोनों के रिश्ते के बारे में पहले से पता था। पीठ ने कहा कि हत्या की वजह शादी समारोह में नीतीश और भारती का एक साथ डांस करना था। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यह जवान व्यक्तियों द्वारा एक जवान व्यक्ति को मारने की घटना है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने विकास, विशाल और सुखदेख को दोषी मानने को सही ठहराया है।

हालांकि शीर्ष अदालत दोषियों द्वारा सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई है। गौरतलब है कि वर्ष 16 फरवरी 2002 में नीतीश की हत्या कर दी गई थी और बाद में उसके शव को जला दिया गया।

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