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निर्भया गैंगरेप-हत्या कांडः सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की दोषियों को तुरंत फांसी की मांग वाली याचिका

Thu, 13 Dec 2018 11:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Dec 2018 11:40 AM IST
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Nirbhaya gangrape murder case Supreme Court dismisses the PIL to execute all 4 death row convicts
Nirbhaya
उच्चतम न्यायालय ने साल 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में चार दोषियों को तुरंत मौत की सजा देने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘आप किस तरह की याचना कर रहे हैं? आप अदालत का मजाक बना रहे हैं?’’ 

गौरतलब है कि 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से साल 2012 में 16-17 दिसंबर की दरम्यिानी रात को छह लोगों ने दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में नृशंसता से सामूहिक बलात्कार किया और उसे सड़क पर फेंक दिया। उसकी 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी।
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उच्चतम न्यायालय ने नौ जुलाई को तीन दोषियों मुकेश (31), पवन गुप्ता (24) और विनय शर्मा (25) की शीर्ष अदालत के आदेश की समीक्षा वाली याचिकाएं खारिज कर दी थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था।
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मौत की सजा पाए चौथे दोषी अक्षय कुमार सिंह (33) ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी।

दिल्ली महिला आयोग भी मांग चुकी है जवाब

वंसत कुंज इलाके में वर्ष 2012 में चलती बस में हुए निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा पर अमल न होने पर दिल्ली महिला आयोग ने नाराजगी जताई थी। फांसी संबंधी फैसले पर अमल न होने पर आयोग ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। आयोग ने प्रशासन को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि दोषियों को फांसी देने के लिए जेल अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा था इस मामले में उच्चतम न्यायलय ने चारों दोषियों की अपील खारिज करते हुए 5 मई 2017 को फांसी संबंधी फैसले पर मोहर लगा दी गई थी। इसके बाद मामले में दोषियों ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी और सर्वोच्च न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 को इसे भी ख़ारिज कर दिया था।

आयोग ने इस संबंध में तिहाड़ जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल को नोटिस जारी किया था। अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है कि क्या दोषियों को फांसी देने के लिए जेल अधिकारियों ने क्या कदम उठाए है।

स्वाति मालीवाल ने कहा था कि 6 साल पहले हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब भी बलात्कार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है। ऐसी घटनाएं बढ़ने की वजह यह है कि अपराधियों के मन में कोई डर नहीं है। जरूरी है कि अपराधियों के मन में डर पैदा हो, इसके लिए निर्भया के कातिलों को जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाया जाए। जिससे कि निर्भया और उसके परिवार को न्याय मिल सके।

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