फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Nirbhaya Case: Pawan Jallad reach to Tihar jail

निर्भया केस: दोषियों को सूली पर चढ़ाने के लिए पवन जल्लाद तिहाड़ जेल पहुंचा

Thu, 30 Jan 2020 10:38 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Thu, 30 Jan 2020 10:38 PM IST
विज्ञापन
Nirbhaya Case: Pawan Jallad reach to Tihar jail
पवन जल्लाद - फोटो : अमर उजाला

एक फरवरी को फांसी होगी या नहीं इसकी अटकलों के बीच गुरुवार शाम जल्लाद पवन मेरठ से तिहाड़ जेल पहुंचा। तिहाड़ में उसके रहने की व्यवस्था की गई है। जेल सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को जल्लाद की उपस्थिति में फांसी का अभ्यास किया जाएगा। इस दौरान सभी संबंधित कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहेंगे जिनका जेल मेन्युअल के अनुसार मौजूद रहना जरूरी है। 

विज्ञापन


जेल सूत्रों का कहना है कि जिन कर्मचारी और अधिकारी को फांसी के दौरान मौजूद रहना है उनकी लिस्ट तैयार कर ली गई है। जेल प्रशासन बक्सर से मंगाई गई रस्सी शुक्रवार को अभ्यास के दौरान जल्लाद को सौंपेगा जिससे वह फंदा तैयार करेगा। इसके पहले वह दोषियों की रिपोर्ट देखेगा और फंदे की लंबाई तय करेगा। दोषियों के वजन के अनुसार ही पुतले का वजन तय करेगा। अभ्यास के दौरान कोई गड़बड़ी होने पर उसे तत्काल सुधारा जाएगा। अभ्यास के दौरान फांसी घर में वैसी ही खामोशी रहेगी, जैसी फांसी देने के समय होती है और सारी बातें इशारों में की जाती हैं। 
विज्ञापन


तीन घंटे की होती है फांसी की प्रक्रिया 
जेल सूत्रों के अनुसार फांसी की पूरी प्रक्रिया में तीन घंटे का समय लगता है। फांसी के दिन दोषियों को सुबह पांच बजे उठा दिया जाता है। नहाने के बाद दोषियों को नए कपड़े पहने को दिए जाते हैं। उसके बाद चाय-नाश्ता के बारे में पूछा जाता है। इस दौरान जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, मेडिकल आफिसर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट व करीब 12 सुरक्षा कर्मचारी वहां पहुंच जाते हैं। मजिस्ट्रेट दोषियों से अंतिम इच्छा पूछते हैं जिसमें खासकर संपत्ति को किसी के नाम करने, कोई वसीयत करने की इजाजत दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके बाद जल्लाद उनके चेहरे को काले कपड़े से ढक देता है। उनके हाथों को पीछे बांध दिया जाता है। उसके बाद तय समय पर सुरक्षा कर्मियों की मदद से दोषियों को फांसी घर ले जाया जाता है। जल्लाद इससे पहले वहां फांसी के फंदे को लटकाकर रखता है। दोषियों के वहां पहुंचने पर जल्लाद उनके गले में फंदा डाल देता है और जेल अधीक्षक का इशारा होते ही लीवर खींच देता है। उसके बाद करीब दो घंटे के बाद मेडिकल जांच के बाद मेडिकल आफिसर मौत का सर्टिफिकेट जारी करता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed