निर्भया केस LIVE : अब सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं दोषियों के वकील, निर्भया की मां को आशा सुबह हो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्भया मामले में दोषियों के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए त्वरित याचिका दायर की है। दिल्ली हाईकोर्ट मामले में सुनवाई कर रहा है। आज दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों की ओर से फांसी टलवाने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की खंडपीठ मामले में सुनवाई कर रही है। तीन दोषियों ने इस आधार पर फांसी पर रोक लगाने की मांग की है कि अभी उनकी कई न्यायिक याचिकाएं लंबित हैं।
- सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आपके पास कोई टिप्पणी नहीं है, कोई हलफनामा नहीं है, पार्टियों का कोई ज्ञापन नहीं है। इस मामले में कुछ भी नहीं है। क्या आपको (एपी सिंह) यह याचिका दायर करने की अनुमति है?
- सिंह जवाब देते हैं हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण कोई फोटो कॉपी मशीन काम नहीं कर रही है।
- कोर्ट ने कहा कि आपने आज तीन याचिकाएं लगाई, आप ये नहीं कह सकते कि चीजें काम नहीं कर रहीं। हम यहां रात को 10 बजे आपको सुन रहे हैं।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दोषी अक्षय कुमार सिंह की पत्नी की तलाक की याचिका फांसी रोकने के लिए प्रासंगिक नहीं है।
- हाईकोर्ट ने कहा कि चारों दोषियों की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुकी है। हम इसकी समीक्षा के लिए नहीं कर सकते।
- दोषियों के वकील एपी सिंह ने दलील दी कि एक याचिका राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी लंबित है। जब ये सभी याचिकाएं लंबित हैं तो फांसी कैसे हो सकती है?
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने वकील एपी सिंह से कहा कि केवल कानूनी बिंदुओं पर बात करें, हम यह नहीं समझ रहे हैं कि आप यहां क्या तर्क दे रहे हैं।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता एपी सिंह से कहा, समय समाप्त हो रहा है, पर्याप्त समय नहीं है।
- दिल्ली हाई कोर्ट से एपी सिंह से कहा कि हम उस समय के करीब हैं जब आपके मुवक्किल भगवान से मिलने वाले हैं। समय बर्बाद नहीं करे। यदि आप कोई महत्वपूर्ण दलील नहीं दे सकते तो हम ग्यारह बजे आपकी मदद नहीं कर सकते। आपके पास केवल 4-5 घंटे हैं। अगर आपके पास कोई महत्वपूर्ण बिंदु है तो उसपर आएं।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने उच्च न्यायालय ने एपी सिंह से कहा कानून उन लोगों का पक्षधर है जो समय पर कार्रवाई करते हैं। ढाई साल 4 मार्च, 2020 आप क्या कर रहे थे ? आप ब हम पर आरोप लगा रहे हैं? अभी 10:45 बजे है, सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी हैं। हमें एक महत्वपूर्ण बिंदु दें।
- हमें आपकी याचिका में कोई आधार नहीं मिला - दिल्ली हाई कोर्ट
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता एपी सिंह से कहा कि यह चौथा डेथ वारंट हैं। हमे इसे कुछ तो सम्मान देना चाहिए।
- एपी सिंह ने कोर्ट से कहा कि न्याय में जलदबाजी अन्याय है। कोर्ट ने सिंह से कहा कि आपने एक भी कानूनी बिंदु नहीं उठाया है।
- दूसरे वकील शम्स ख्वाजा ने दोषियों का पक्ष रखना शुरू किया।
- निर्भया के दोषियों के वकील ख्वाजा ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति ने एक कार्यक्रम में कहा था कि यौन उत्पीड़न में मौत की सजा पाने वाले दया के पात्र नहीं हैं। वे पहली दया याचिका से पहले ही हमारे खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त थे।
- निर्भया के दोषियों को आज सवेरे 5.30 बजे फांसी दी जाएगी। फांसी पर रोक के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने दोषियों के वकील की आखिरी दलील भी खारिज कर दी।
- हाईकोर्ट में झटके के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि फैसले (हाईकोर्ट) की प्रति मिलते ही मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा। मैंने रजिस्ट्रार से बात की है।
इससे पहले आज निर्भया के दोषियों की तीन याचिकाएं खारिज हुई हैं।
पवन की क्यूरेटिव याचिका खारिज
- निर्भया के दोषी पवन का फांसी से बचने का एक और पैंतरा कामयाब नहीं हो सका। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पवन की क्यूरेटिव याचिका रद्द कर दी है, जिसमें उसने घटना के वक्त खुद को नाबालिग बताया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया गया कि उसकी याचिका पर उचित सुनवाई नहीं की गई और याचिका को खारिज कर दिया गया।
मुकेश की याचिका हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज
- दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद निर्भया मामले के दोषी मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए दावा किया कि दिसंबर 2012 में हुए अपराध के समय वह दिल्ली में नहीं था। गुरुवार दोपहर में जब इसकी सुनवाई शुरू हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अब इस सब बातों का कोई मतलब नहीं है, हर अदालत ने आपकी सभी याचिकाएं सही तरीके से सुनी हैं।
अक्षय और पवन की दूसरी दया याचिका सुनने से राष्ट्रपति का इनकार
- मुकेश और पवन की याचिकाएं खारिज होने के साथ ही राष्ट्रपति ने अक्षय और पवन की दूसरी याचिका पर गौर करने से भी इनकार कर दिया।