निर्भया केसः दोषी विनय की भी याचिका खारिज, अब तक तीन दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी विनय शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने दया याचिका को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। इस तरह से अब निर्भया के तीन दोषियों के सभी कानूनी विकल्प पूरी तरह से खत्म हो गए हैं।
अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि विनय की मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि वह शारिरीक रूप से स्वस्थ्य है और उसका स्वास्थ्य एक समान बना हुआ है। यह कारण देते हुए अदालत ने विनय की याचिका खारिज कर दी।
Supreme Court also said in its order, that the medical reports said that Vinay is psychologically fit and his medical condition is stable.
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The Apex Court dismissed his petition, finding it devoid of merit. https://t.co/uQEv1iM9OL
— ANI (@ANI) February 14, 2020
विनय की गुरुवार को अदालत में दलील: मैं खेती करने वाले परिवार से, आदतन अपराधी नहीं
विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल को जेल में लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी, इसके अलावा उसे कई तरह की दवाएं भी दी गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में पहली बार चार युवाओं को फांसी दी जा रही है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इस पर अदालत ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वह कानूनी बिंदुओं पर ही बात करें। तब एपी सिंह ने अदालत से कहा, विनय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह आदतन अपराधी नहीं है, बल्कि एक खेती करने वाले परिवार से है।
वहीं, वकील एपी सिंह ने कहा कि मैं अन्याय को रोकना चाहता हूं, आधिकारिक फाइल पर गृह मंत्री और एलजी के दस्तखत का नहीं हैं, इसलिए मैं फाइल का निरीक्षण करना चाहता हूं।
मैंने इसके लिए आरटीआई दाखिल की है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज व्हाट्सऐप से मंगाया गया है। इस पर जस्टिस भानुमति ने कहा कि यह दस्तावेज आपके लाभ के लिए नहीं है, यह अदालत की संतुष्टि के लिए है।
मेहता ने कहा, राष्ट्रपति के समक्ष सभी स्थिति साफ की गई थी
जस्टिस अशोक भूषण ने एपी सिंह ने कहा कि आप ये सब बताने की बजाय सिर्फ अपनी कानूनी दलीलें रखें। विनय शर्मा की ओर से जब एपी सिंह ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अदालत के फैसले, मेडिकल रिपोर्ट, परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को राष्ट्रपति के सामने रखा गया था। उसी के बाद दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में ये दलील नहीं दी जा सकती है।