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फसलों को निगल रही है नीलगायों की दौड़, किसानों और वाहन चालको पर मुसीबत
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:22 AM IST
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नील गाय
- फोटो : अमर उजाला
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हाल ही में बिहार में नीलगायों को मारे जाने पर केंद्र सरकार के दो मंत्रियों के बीच काफी बहस हुई थी। वहीं नीलगाय आज के समय में ग्रेटर नोएडा के किसानों व लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन रही है।
कंकरीट के ढेर में तब्दील होते जंगल, गांव में रिहायशी बिल्डिंग का निर्माण बदस्तूर जारी है। नीलगायों के लिए आवास भी खत्म हो गया है। आखिर वह यहां से जाएं तो कहां। नतीजतन, वह सड़कों व खेतों में झुंड बनाकर घूमते दिख रहे हैं।
खाने के लिए खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर रहे हैं। इसको लेकर किसानों व लोगों में रोष भी है। आमतौर पर देखा जाए तो नीलगाय राजस्थान, मध्य प्रदेश, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, बिहार व आंध्र प्रदेश में पाई जाती हैं, लेकिन यहां भी इनकी संख्या बहुतायत है। दरअसल, ग्रेनो वेस्ट में जहां लाखों फ्लैट दिख रहे हैं।
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वहां कभी खेत व जंगल थे। यह जंगल नीलगाय के पैत्रिक आवास थे। ऐसे में भोजन की तलाश में इनका रुख पूरे ग्रेटर-नोएडा की ओर है। यह सड़कों पर अक्सर दौड़ लगाते हुए देखे जा रहे हैं, जिसको लेकर वाहन चालक भी भयभीत रहते हैं।
इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रशासनिक अमला सिर्फ आश्वासन दे रहा है। पिछले दिनों दिल्ली के विजय चौक पर 25 मई को एक नीलगाय ने सड़क पर हंगामा किया था। इसके चलते वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई थी।
वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे पर नीलगाय की टक्कर के बाद हादसे में वाहन चालक की मौत हो गई थी। लोगों की सुरक्षा के लिए ग्रेनो से लेकर आगरा तक जगह-जगह नीलगाय के एक्सप्रेस-वे पर आने को लेकर बोर्ड भी लगाए गए हैं।
खड़ी फसल कर रहे चौपट
ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में खेत खलियान फैला हुआ है। ऐसे में यहां आए दिन नीलगाय फसलों को तहस-नहस कर देते हैं। भोजन की तलाश में झुंड में खेतों में घुसते हैं और खड़ी फसल को रौंदकर चले जाते हैं। एहतियात के तौर पर अब किसानों ने खेतों के चारो ओर तारों की फेसिंग करनी शुरू कर दी है। ताकि नीलगाय उनके खेतों को बर्बाद न कर सकें।
पिछले दिनों नीलगाय को मारी थी गोली
हाल ही में जेवर स्थित गांव के एक पूर्व प्रधान ने खेत में फसल बर्बाद कर रही नीलगाय को गोली मार दी थी, जिसको लेकर हंगामा मच गया था। इसके बाद जेवर थाने में पूर्व प्रधान के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। इसके बाद भी प्रशासनिक अमला शांत है।
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कंकरीट के ढेर में तब्दील होते जंगल, गांव में रिहायशी बिल्डिंग का निर्माण बदस्तूर जारी है। नीलगायों के लिए आवास भी खत्म हो गया है। आखिर वह यहां से जाएं तो कहां। नतीजतन, वह सड़कों व खेतों में झुंड बनाकर घूमते दिख रहे हैं।
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खाने के लिए खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर रहे हैं। इसको लेकर किसानों व लोगों में रोष भी है। आमतौर पर देखा जाए तो नीलगाय राजस्थान, मध्य प्रदेश, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, बिहार व आंध्र प्रदेश में पाई जाती हैं, लेकिन यहां भी इनकी संख्या बहुतायत है। दरअसल, ग्रेनो वेस्ट में जहां लाखों फ्लैट दिख रहे हैं।
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वहां कभी खेत व जंगल थे। यह जंगल नीलगाय के पैत्रिक आवास थे। ऐसे में भोजन की तलाश में इनका रुख पूरे ग्रेटर-नोएडा की ओर है। यह सड़कों पर अक्सर दौड़ लगाते हुए देखे जा रहे हैं, जिसको लेकर वाहन चालक भी भयभीत रहते हैं।
इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रशासनिक अमला सिर्फ आश्वासन दे रहा है। पिछले दिनों दिल्ली के विजय चौक पर 25 मई को एक नीलगाय ने सड़क पर हंगामा किया था। इसके चलते वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई थी।
वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे पर नीलगाय की टक्कर के बाद हादसे में वाहन चालक की मौत हो गई थी। लोगों की सुरक्षा के लिए ग्रेनो से लेकर आगरा तक जगह-जगह नीलगाय के एक्सप्रेस-वे पर आने को लेकर बोर्ड भी लगाए गए हैं।
खड़ी फसल कर रहे चौपट
ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में खेत खलियान फैला हुआ है। ऐसे में यहां आए दिन नीलगाय फसलों को तहस-नहस कर देते हैं। भोजन की तलाश में झुंड में खेतों में घुसते हैं और खड़ी फसल को रौंदकर चले जाते हैं। एहतियात के तौर पर अब किसानों ने खेतों के चारो ओर तारों की फेसिंग करनी शुरू कर दी है। ताकि नीलगाय उनके खेतों को बर्बाद न कर सकें।
पिछले दिनों नीलगाय को मारी थी गोली
हाल ही में जेवर स्थित गांव के एक पूर्व प्रधान ने खेत में फसल बर्बाद कर रही नीलगाय को गोली मार दी थी, जिसको लेकर हंगामा मच गया था। इसके बाद जेवर थाने में पूर्व प्रधान के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। इसके बाद भी प्रशासनिक अमला शांत है।