बड़ी रिहायशी परियोजनाओं के लिए जिला प्राधिकरण से मंजूरी पर एनजीटी ने लगाई रोक
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें बड़ी रिहायशी परियोजनाओं के लिए रियल एस्टेट को पर्यावरण मंजूरी लेने की शर्त को खत्म कर दिया गया था।
पीठ ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए बचाव सिद्धांत और सतत विकास के विपरीत है। पीठ ने कहा कि किसी व्यवस्था का विकेंद्रीकरण ठीक है, लेकिन यह एक विश्वसनीय तंत्र के तहत होना चाहिए।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 14 और 15 नवंबर को 50 हजार वर्ग मीटर तक भवन निर्माण और 20 हजार वर्ग मीटर से लेकर 1.5 लाख वर्ग मीटर तक की औद्योगिक, अस्पताल और शैक्षणिक भवन निर्माण परियोजना को जिला स्तरीय स्थानीय प्राधिकरणों के जरिये ही मंजूरी हासिल करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इस खबर को अमर उजाला की तरफ से सर्वप्रथम प्रकाशित किया गया था।
बीते वर्ष रद्द की गई थी अधिसूचना
पीठ ने कहा कि बीते वर्ष 8 दिसंबर को ट्रिब्युनल ने इस आशय वाली एक अधिसूचना को रद्द कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि इस तरह की अधिसूचना से पूरे देश में पर्यावरण की क्षति होगी। पीठ ने कहा इस बार जारी की गई अधिसूचना भी प्रथम दृष्टि में अनुचित प्रतीत होती है। यदि मंजूरी संबंधी विकेंद्रीकरण करना है तो इसके लिए सबसे पहले एक विश्वसनीय तंत्र होना चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।
अमर उजाला ने 18 नवंबर के अंक में प्रकाशित की थी खबर
अमर उजाला ने 18 नवंबर के अंक में ‘रियल एस्टेट के लिए पर्यावरण मंजूरी की शर्त खत्म’ शीर्षक से पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचनाओं को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। इसमें पर्यावरणविदें ने अधिसूचना को कानूनी चुनौती देने की बात कही थी।