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एनजीटी ने लगाया गैमन इंडिया-हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन पर एक-एक करोड़ का अंतरिम जुर्माना
Thu, 14 Feb 2019 05:14 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 14 Feb 2019 05:14 AM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जम्मू-कश्मीर में ऊधमपुर से बनिहाल तक राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान प्रदूषण फैलाने और पर्यावरणीय क्षति के लिए परियोजना प्रस्तावक गैमन इंडिया और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन को लिमिटेड पर एक-एक करोड़ रुपये का अंतरिम जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि दोनों कंपनियों को जुर्माने के अलावा काम पूरा होने की गारंटी (परफॉरमेंस गारंटी) के भी एक-एक करोड़ रुपये जमा करने होंगे।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची अमरेश सिंह के मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि निर्माण कार्य की पूरी गतिविधि को जांचने और निरीक्षण के बाद गठित समिति की रिपोर्ट यह स्पष्ट तौर पर बताती है कि दोनों कंपनियों के जरिये न सिर्फ अवैध डंपिंग साइट का इस्तेमाल किया गया, बल्कि पर्यावरण को क्षति भी पहुंचाई गई।
पीठ ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व जज जस्टिस जेआर कोतवाल की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित की थी। इस समिति ने अपनी निर्णायक रिपोर्ट में पर्यावरण को दुरुस्त करने के सुझाव भी दिए हैं। समिति ने कहा कि बनिहाल-रामसू और डिगडोल भाग में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया गया है। समिति ने कहा कि न सिर्फ बैतरी चेश्मा के पास नाला चोक है, बल्कि चेनाब नदी को भी प्रदूषित किया जा रहा है।
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पीठ ने कहा है कि निगरानी समिति ने परियोजना प्रस्तावकों को पर्यावरण सुधारने के जो सुझाव दिए हैं, उन पर तीन महीने के भीतर अमल होना चाहिए। जुर्माने की राशि सीपीसीबी के पास जमा की जानी चाहिए। पीठ ने 30 जून तक सीपीसीबी से आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी तलब की है। मामले पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची अमरेश सिंह के मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि निर्माण कार्य की पूरी गतिविधि को जांचने और निरीक्षण के बाद गठित समिति की रिपोर्ट यह स्पष्ट तौर पर बताती है कि दोनों कंपनियों के जरिये न सिर्फ अवैध डंपिंग साइट का इस्तेमाल किया गया, बल्कि पर्यावरण को क्षति भी पहुंचाई गई।
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पीठ ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व जज जस्टिस जेआर कोतवाल की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित की थी। इस समिति ने अपनी निर्णायक रिपोर्ट में पर्यावरण को दुरुस्त करने के सुझाव भी दिए हैं। समिति ने कहा कि बनिहाल-रामसू और डिगडोल भाग में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया गया है। समिति ने कहा कि न सिर्फ बैतरी चेश्मा के पास नाला चोक है, बल्कि चेनाब नदी को भी प्रदूषित किया जा रहा है।
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पीठ ने कहा है कि निगरानी समिति ने परियोजना प्रस्तावकों को पर्यावरण सुधारने के जो सुझाव दिए हैं, उन पर तीन महीने के भीतर अमल होना चाहिए। जुर्माने की राशि सीपीसीबी के पास जमा की जानी चाहिए। पीठ ने 30 जून तक सीपीसीबी से आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी तलब की है। मामले पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।