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एनजीटी ने तलब की दिल्ली की लैंडफिल साइटों की रिपोर्ट

Mon, 03 Jun 2019 04:54 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Mon, 03 Jun 2019 04:54 AM IST
सार

- तीन नगर निगम के आयुक्तों को भी 11 जुलाई को दिया पेश होने का आदेश

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NGT demanads Delhis Landfill Sites Report
फाइल फोटो

विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी में कूड़ा प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपना लिया है। एनजीटी ने दिल्ली की तीन नगर निगमों से कूड़े के रखरखाव के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने यह कदम उन खबरों के बाद उठाया है, जिनमें दावा किया गया था कि भलस्वा, गाजीपुर और ओखला लैंडफिल साइटों के कारण नजदीकी अनधिकृत बस्तियों में भूजल प्रदूषित हो रहा है।
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एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को एक महीने के अंदर यह एक्शन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 जुलाई को तीनों नगर निगमों के आयुक्तों को भी निजी तौर पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि ठोस शहरी कूड़ा प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के हिसाब से कचरे के प्रबंधन और उससे जुड़े मुद्दों के निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगमों की ही है। 
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हालात हैं बेहद खराब
भलस्वा, गाजीपुर और ओखला लैंडफिल साइटों के आसपास के हालात बेहद खराब हैं। यहां भूजल का रंग पीला-नारंगी हो चुका है, जबकि इसमें भारी धातुओं की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदंडों से भी बहुत ज्यादा पाई गई है। पानी में घुलनशील ठोस 3205 मिलीग्राम प्रति लीटर तक है, जबकि क्लोरीन नाइट्रेट, अमोनिया व आयरन का पीएच 8.5 तक है।
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यमुना के प्रदूषण का भी कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, इन लैंडफिल साइटों पर लगे कूड़े के पहाड़ जैसे ढेर का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन नहीं होने का असर भूजल पर ही नहीं यमुना नदी पर भी दिखाई दे रहा है। इन लैंडफिल साइटों पर कूड़ा गलने के कारण निकलने वाली गंदगी बहकर यमुना नदी में भी पहुंच रही है और उसके प्रदूषण का बड़ा कारण बन रही है। 

कहां पर कितना कूड़ा
भलस्वा- 2000 मीट्रिक टन प्रति दिन
गाजीपुर- 2100 मीट्रिक टन प्रति दिन
ओखला- 1200 मीट्रिक टन प्रति दिन
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