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चंद घंटों पहले जन्मी बेटी को लेकर अस्पतालों की छानी खाक, वेंटिलेटर ना मिलने से गई जान

Fri, 22 Sep 2017 12:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 Sep 2017 12:33 PM IST
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newly born dies in delhi as she do not get ventilator in all big hospitals of capital

राजधानी के अस्पतालों में काफी समय से चली आ रही वेंटिलेटर की कमी अब नासूर बन चुकी है। इसी कमी के चलते फिर एक नवजात की जान चली गई। नवजात बच्ची को बचाने के लिए परिजन बुधवार रातभर अस्पतालों की खाक छानते रहे, मगर किसी भी अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर खाली नहीं मिल पाया।

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आखिर में चंद घंटों पहले जन्मी बच्ची मौत से लड़ते-लड़ते हार गई और बृहस्पतिवार सुबह दम तोड़ दिया। गौर करने वाली बात ये है कि वेंटिलेटर को लेकर परिजनों ने न सिर्फ स्थानीय नेताओं, बल्कि एंटी करप्शन ब्यूरो से भी मदद मांगी, लेकिन कहीं भी मदद नहीं मिली। दिल्ली में यह पहला केस नहीं है, इससे पहले भी कई लोग वेंटिलेटर के अभाव में दम तोड़ चुके हैं।
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बुधवार को पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर निवासी रिजवान अहमद को दोपहर तकरीबन 1:45 पर शास्त्री पार्क स्थित जग प्रवेश चंद अस्पताल में पोती हुई। चूंकि जन्म के साथ बच्ची को श्वास लेने में तकलीफ हो रही थी, इसलिए डॉक्टरों ने तत्काल उसे वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की सलाह दी। चूंकि उनके अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं है, इसलिए डॉक्टरों ने पत्र लिखकर परिजनों से अन्य सरकारी अस्पतालों में संपर्क करने को कहा।

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उम्मीद चाचा नेहरू अस्पताल से बची थी, लेकिन वहां भी...

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रिजवान अहमद ने बताया कि डॉक्टर के पत्र को लेकर वह और उनका बेटा एक के बाद एक तीन अस्पतालों की खाक छानते चले गए, लेकिन कहीं भी डॉक्टरों ने आगे बढ़कर बच्ची को भर्ती करने की बात नहीं की।

बताते हैं कि आखिरी उम्मीद चाचा नेहरू अस्पताल से बची थी, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने इनकार किया, तो बेबस परिजन अपना आपा खो बैठे। डॉक्टरों से काफी बहस भी हुई, लेकिन अंत में उन्हें बैरंग ही आना पड़ा।

अंबु बैग से चलाया कुछ देर काम
परिजनों के मुताबिक, बच्ची को जब श्वास लेने में तकलीफ हो रही थी, तो डॉक्टरों ने अंबु बैग के जरिये उसे कुछ देर राहत दी थी। ये बैग भी उन्हें बाहरी मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाना पड़ा था, लेकिन कुछ देर बाद जग प्रवेश चंद अस्पताल के स्टाफ ने अंबु बैग को पंप करने से मना कर दिया।

रिजवान अहमद ने बताया कि दिल्ली गेट स्थित लोकनायक अस्पताल में उन्होंने डॉक्टरों से काफी मिन्नत की, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में बच्ची तो दूर, उसके कागज देखने के लिए भी डॉक्टर राजी नहीं थे। इसके बाद जीटीबी और आखिर में वे चाचा नेहरू अस्पताल पहुंचे, वहां भी डॉक्टरों ने उनके साथ अभद्रता की।

वेंटिलेटर अगर खाली होता तो ऐसा नहीं है कि मरीज को नहीं मिलता। निक्कू में एक भी वेंटिलेटर खाली नहीं था, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह जब खाली हुआ, तो संबंधित डॉक्टर से संपर्क किया गया, लेकिन तब तक पता चला कि बच्ची ने दम तोड़ दिया है।-डॉ. अनूप मोहता, निदेशक, चाचा नेहरू अस्पताल

मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। न ही मेरे पास किसी भी तरह की शिकायत आई है।-डॉ. सुनील कुमार, डायरेक्टर, जीटीबी अस्पताल

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