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Murder Mystery: मोनिका हत्याकांड में नया मोड़, UPSC और SSC के डाटा में न मिला नाम, पर एक फोटो ने खोल दिया राज

Wed, 04 Oct 2023 09:37 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 04 Oct 2023 09:37 AM IST
सार

पूर्व महिला सिपाही मोनिका की हत्या का मामले में नया मोड़ आ गया है। यूपीएससी और एसएससी के डाटा में नाम नहीं मिला है। ऐसे में जांच की दिशा बदल गई है। मृतका के परिजनों के पास आने वाले फोन नंबर की आईडी चेक कराई। इसमें आरोपी के साथी का ओरिजनल फोटो मिलने से पुलिस उस तक पहुंच गई और फिर हत्याकांड से पर्दा उठने में देर नहीं लगी। 

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New twist in the murder case of former woman constable Monica name not found in UPSC and SSC data
मोनिका यादव हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली पुलिस की पूर्व सिपाही एवं यूपी पुलिस की सब इंस्पेक्टर मोनिका की हत्या का आखिर परदाफाश हो ही गया। दिल्ली पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए यूपीएससी व एसएससी का डाटा चेक किया तो उसमें कही भी मोनिका का नाम नहीं मिला। 
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इसके बाद पुलिस ने जांच की दिशा बदली और मृतका के परिजनों के पास आने वाले फोन नंबर की आईडी चेक कराई। इसमें आरोपी के साथी का ओरिजनल फोटो मिलने से पुलिस उस तक पहुंच गई और फिर हत्याकांड से पर्दा उठने में देर नहीं लगी। 
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अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मोनिका यादव की हत्या का मामला जुलाई महीने के आखिर में मुखर्जी नगर पुलिस स्टेशन से अपराध शाखा को ट्रांसफर हुआ था। जांच शाखा में तैनात पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया की देखरेख में एसीपी रविंद्र राजपूत व इंस्पेक्टर राजीव कक्कड को सौंपी गई। 
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जांच के बाद एसीपी रविंद्र राजपूत व राजीव कक्कड़ को ये आइडिया आया कि अगर मोनिका कहीं यूपीएससी व एसएससी की परीक्षाओं की तैयारी कर रही है तो उसका यूपीएससी व एसएससी के रिकार्ड में नाम जरूर होगा। आरोपी सुरेंद्र सिंह राणा ने मृतका के परिजनों को बता रखा था कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रही है। इस परीक्षा के कारण मोनिका ने अपने परिजनों से दो वर्ष तक संपर्क नहीं किया था।
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ऐसे में दिल्ली पुलिस ने यूपीएससी व एसएससी के रिकार्ड में मोनिका का डाटा पता करवाया। पुलिस ने वर्ष 2021 के बाद से लेकर अब तक डाटा दिखवाया था। मगर रिकार्ड में मोनिका का नाम, पिता का नाम, पता आदि कोई जानकारी नहीं मिली।

ऐसे में अपराध शाखा को ये सुनिश्चित हो गया कि मोनिका कोई परीक्षा नहीं दे रही थी। इसके बाद पुलिस ने प्राइवेट कंपनियों से संपर्क साधना शुरू किया कि कहीं मोनिका नौकरी न कर रही हो। पुलिस ये सोच ही रही थी कि तभी उसे दूसरा अहम क्लू मिला। वह था परिजनों के पास आने वाले मोबाइल फोन का नंबर।

एक पासपोर्ट साइज फोटो ने खोला राज
पुलिस को ये पता लग गया कि मोनिका कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं दे रही है तो फिर कुछ गलत होने की आशंका हुई। मोबाइल सर्विलांस पर काम कर रही पुलिस टीम को पता लगा कि जिस मोबाइल नंबर से मोनिका के परिजनों को फोन किए जा रहे हैं, वह पवन के नाम से लिया हुआ है। मगर यहां पर आरोपी एक बड़ी चूक कर बैठे। आरोपी सुरेंद्र राणा ने पवन नाम का आधार कार्ड दिया था। सिम लेते समय आरोपियों ने तीसरे आरोपी राजपाल की असली फोटो दी थी। दिल्ली पुलिस ने इस फोटो से राजपाल की पहचान करनी शुरू की।
 

शहीद हो गए थे मोनिका के पिता: दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मोनिका के पिता ब्रह्मपाल यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे। वह बस में लूट के आरोपी बदमाश को पकडऩे के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बदमाश की गोली ब्रह्मपाल के सिर में लगी थी। ये घटना वर्ष 2005 की है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

एप से हुई आरोपी के फोटो की पहचान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने सिम कार्ड लेने वाले फार्म पर मिली राजपाल की फोटो की पहचान करने के प्रयास शुरू किए। एक एप का इस्तेमाल किया और ये फोटो राजपाल नाम के व्यक्ति की फोटो से मैच हो गई। इसके बाद पुलिस राजपाल तक पहुंच गई। राजपाल ने हत्या के राज से परदा उठा दिया। इसके बाद पुलिस ने रोबिन, सुरेंद्र सिहं राणा को गिरफ्तार कर लिया।

हत्यारों को फांसी की मांग
उधर, दिल्ली पुलिस की सिपाही मोनिका की हत्या के मामले में बुलंदशहर के गुलावठी में पीड़ित परिजनों ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। मृतका की बहन तपस्या का कहना है कि मोनिका को न्याय दिलाने में वह पीछे नहीं रहेंगी। मुख्य आरोपी समेत सभी आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उसने बताया कि मोनिका का चयन यूपी पुलिस में महिला दारोगा के लिए हो गया था। दरोगा की ड्यूटी ज्वाइन करने से पूर्व ही आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। वह यूपीएससी की तैयारी भी कर रही थी।
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