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ई सिगरेट पर जल्द फैसला ले सकती है केंद्र सरकार, कई मंत्रियों की कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार
Sat, 14 Sep 2019 05:13 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 14 Sep 2019 05:13 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटोॉ
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ई सिगरेट और ईएनडीएस जैसे उत्पाद पर केंद्र सरकार जल्द फैसला ले सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ई सिगरेट पर प्रतिबंध या इसके नियमन को लेकर जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। कई मंत्रियों की बनी कमेटी में इस पर विचार चल रहा है। उधर, इसे लेकर चिकित्सा क्षेत्र भी दोफाड़ दिखाई पड़ रहा है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ई सिगरेट पर प्रतिबंध की पैरवी कर चुका है। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल इसके नियमन के पक्षधर हैं। जबकि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा का मानना है कि ई सिगरेट स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। छात्रों में इसका चलन बढ़ रहा है। इस पर प्रतिबंध लगना जरूरी है।
जेएनयू के अर्थशास्री सुजॉय चक्रवर्ती का कहना है कि जब भारतीय आबादी के मामूली हिस्से को ही ईएनडीएस की जानकारी है और बहुत कम लोग ही इसका उपयोग करते हैं तो फिर अध्यादेश किस बात का? ईएनडीएस पर अध्यादेश के लिए कदम उठाना अन्यायपूर्ण है। सिगरेट, बीड़ी की तुलना में ये उत्पाद कम हानिकारक हैं, इसके कई प्रमाण मौजूद हैं। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन व वाधवानी फाउंडेशन के पूर्व सलाहकार आमिर उल्ला खान का कहना है कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है। ऐसे में केंद्र सरकार अगर अध्यादेश पारित करती है तो इससे कहीं न कहीं राज्य के स्वाभाविक अधिकार को उनसे दूर करने जैसा होगा। इस देश में प्रतिबंध विरले ही सफल हुए हैं और किसी ठोस वैज्ञानिक शोध के बगैर ईएनडीएस पर प्रतिबंध लगाना जल्दबाजी में लिया पक्षपातपूर्ण निर्णय होगा।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में इसके कई दुष्प्रभाव सामने आने के बाद प्रतिबंध की तैयारी चल रही है। हालांकि भारत में भी सरकार इसे लेकर विशेषज्ञों से राय ले रही है। केंद्रीय मंत्रियों की बनी एक कमेटी ने हाल ही में बैठक कर इस मसले पर चर्चा भी की थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस बारे में फैसला कैबिनेट में रखा जाएगा।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ई सिगरेट पर प्रतिबंध की पैरवी कर चुका है। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल इसके नियमन के पक्षधर हैं। जबकि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा का मानना है कि ई सिगरेट स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। छात्रों में इसका चलन बढ़ रहा है। इस पर प्रतिबंध लगना जरूरी है।
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जेएनयू के अर्थशास्री सुजॉय चक्रवर्ती का कहना है कि जब भारतीय आबादी के मामूली हिस्से को ही ईएनडीएस की जानकारी है और बहुत कम लोग ही इसका उपयोग करते हैं तो फिर अध्यादेश किस बात का? ईएनडीएस पर अध्यादेश के लिए कदम उठाना अन्यायपूर्ण है। सिगरेट, बीड़ी की तुलना में ये उत्पाद कम हानिकारक हैं, इसके कई प्रमाण मौजूद हैं। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन व वाधवानी फाउंडेशन के पूर्व सलाहकार आमिर उल्ला खान का कहना है कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है। ऐसे में केंद्र सरकार अगर अध्यादेश पारित करती है तो इससे कहीं न कहीं राज्य के स्वाभाविक अधिकार को उनसे दूर करने जैसा होगा। इस देश में प्रतिबंध विरले ही सफल हुए हैं और किसी ठोस वैज्ञानिक शोध के बगैर ईएनडीएस पर प्रतिबंध लगाना जल्दबाजी में लिया पक्षपातपूर्ण निर्णय होगा।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में इसके कई दुष्प्रभाव सामने आने के बाद प्रतिबंध की तैयारी चल रही है। हालांकि भारत में भी सरकार इसे लेकर विशेषज्ञों से राय ले रही है। केंद्रीय मंत्रियों की बनी एक कमेटी ने हाल ही में बैठक कर इस मसले पर चर्चा भी की थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस बारे में फैसला कैबिनेट में रखा जाएगा।