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रोहित शेखर हत्याकांडः अपूर्वा नहीं थी शादी से खुश, गिरफ्तारी के बाद दो दिन की पुलिस रिमांड पर
Wed, 24 Apr 2019 05:33 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 24 Apr 2019 05:33 PM IST
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अपूर्वा को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी और उत्तराखंड के सीएम रह चुके दिवंगत एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या के मामले में बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पत्नी अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया है। अपूर्वा से पिछले तीन दिनों से पूछताछ जारी थी।
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अपूर्वा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि अपूर्वा शादी से नाखुश थी और जब रोहित नशे में था तब अपूर्वा ने उसका गला घोंट दिया। उसने बिना किसी मदद के इस हत्या को खुद अंजाम दिया है। पुलिस ने अपूर्वा को साकेत कोर्ट में पेश किया जहां उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने बुधवार दोपहर 2.30 बजे प्रेस कांफ्रेंस कर खुलासा किया कि यह हत्या सुनियोजित नहीं थी।
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अपूर्वा ने पहले से हत्या के बारे में कुछ नहीं सोचा था। दोनों के बीच हुए झगड़े और कुमकुम के साथ शराब पीने की बात सुनकर अपूर्वा को गुस्सा आ गया था जिसके बाद उसने रोहित का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
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अपूर्वा सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं और काफी समय तक पुलिस को अपनी बातों से फंसाती रहीं। वह बार-बार पुलिस को दिया अपना बयान बदलती रहीं जिसके कारण वह पुलिस के शक के दायरे में आ गईं।
अपूर्वा की गिरफ्तारी के बाद इस केस में कई नए खुलासे होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले में धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया था और उसी के तहत पुलिस ने अपूर्वा को गिरफ्तार किया है। यानी अपूर्वा को कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया है और ये बाद में ही पता चल सकेगा कि पुलिस इस मामले में धारा बदलती है या नहीं।
मालूम हो कि रोहित की मां उज्जवला पहले ही दिन से कह रही थीं कि उनके बेटा तनाव में था। उसे मानसिक यातनाएं दी जाती थीं। इसके बाद भी उन्होंने कहा कि शादी के पहले दिन से ही दोनों के बीच तनाव था। उनमें अक्सर झगड़े होते थे।
हत्या की शुरुआती जांच में बरती गई लापरवाही
रोहित की पत्नी अपूर्वा
- फोटो : सोशल मीडिया
दक्षिण जिला पुलिस ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में शुरुआती जांच में जिस तरह लापरवाही बरती थी उस तरह की रोहित हत्या मामले में सामने आ रही है। पुलिस को 17 अप्रैल की शाम इस तरह के संकेत मिल गए थे कि रोहित की हत्या की गई है। इसके बावजूद दक्षिण जिला पुलिस सर्तक नहीं हुई। पुलिस ने न तो पत्नी अपूर्वा का मोबाइल जब्त किया और न ही समय से सीसीटीवी फुटेज को खंगाला था।
दक्षिण जिले एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दक्षिण जिला पुलिस ने सुनंदा पुष्कर केस में शुरुआत में लापरवाही बरती थी और एक वर्ष तक स्वभाविक मौत (सीआरपीसी 174 की कार्रवाई) पर जांच करती रही।
पुलिस ने सुनंदा व उसके परिजनों के मोबाइल फोन को जब्त नहीं किया था और न ही मौके से ठीक से सैंपल लिए थे। रोहित के शव के मैक्स अस्पताल से एम्स की मोर्चरी में ले जाया गया तो वहां डॉक्टरों ने संकेत दे दिए थे कि रोहित की हत्या की गई है। इसके बावजूद डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण जिला पुलिस सर्तक नहीं हुई।
पुलिस स्वाभाविक मौत की कार्रवाई की तैयारी कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करती रही। इस दौरान आरोपी या आरोपियों को सबूत से छेड़छाड़ का काफी समय मिल गया था। डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस ने सीबीआई की फोरेंसिक टीम को नहीं बुलाया था, बल्कि दिल्ली सरकार की एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया था। सीबीआई की फोरेंसिक टीम को एक्सपर्ट माना जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जब रोहित की हत्या का खुलासा हुआ तो सीबीआई की फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया था। पुलिस ने शुरुआत में रोहित के परिजनों के मोबाइल व अन्य सबूत एकत्रित नहीं किए थे।
दक्षिण जिले एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दक्षिण जिला पुलिस ने सुनंदा पुष्कर केस में शुरुआत में लापरवाही बरती थी और एक वर्ष तक स्वभाविक मौत (सीआरपीसी 174 की कार्रवाई) पर जांच करती रही।
पुलिस ने सुनंदा व उसके परिजनों के मोबाइल फोन को जब्त नहीं किया था और न ही मौके से ठीक से सैंपल लिए थे। रोहित के शव के मैक्स अस्पताल से एम्स की मोर्चरी में ले जाया गया तो वहां डॉक्टरों ने संकेत दे दिए थे कि रोहित की हत्या की गई है। इसके बावजूद डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण जिला पुलिस सर्तक नहीं हुई।
पुलिस स्वाभाविक मौत की कार्रवाई की तैयारी कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करती रही। इस दौरान आरोपी या आरोपियों को सबूत से छेड़छाड़ का काफी समय मिल गया था। डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस ने सीबीआई की फोरेंसिक टीम को नहीं बुलाया था, बल्कि दिल्ली सरकार की एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया था। सीबीआई की फोरेंसिक टीम को एक्सपर्ट माना जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जब रोहित की हत्या का खुलासा हुआ तो सीबीआई की फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया था। पुलिस ने शुरुआत में रोहित के परिजनों के मोबाइल व अन्य सबूत एकत्रित नहीं किए थे।