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NCRTC को मिला पहला स्थायी प्रबंध निदेशक, परिवहन योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 12 Jul 2016 02:28 AM IST
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विनय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को पहला स्थायी प्रबंध निदेशक मिल गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने विनय कुमार सिंह की इस पद पर तैनाती की है।
वे भारतीय रेल सेवा के अभियांत्रिक विभाग के अधिकारी और दिल्ली मेट्रो फेज वन में चीफ इंजीनियर के पद पर रह चुके हैं। इनकी नियुक्ति से साफ है कि लंबे समय से लंबित बड़ी रैपिड रेल कॉरीडोर योजनाओं को अब रफ्तार मिलेगी।
एनसीआरटीसी का मकसद एनसीआर शहरों के बीच बेहतर कनेक्टविटी देना और रैपिड रेल कॉरिडोर बनाना है। ताकि, परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ बड़े वाहनों को शहरों के बीच से गुजरने के बजाए बाहर-बाहर निकाला जा सके।
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वे भारतीय रेल सेवा के अभियांत्रिक विभाग के अधिकारी और दिल्ली मेट्रो फेज वन में चीफ इंजीनियर के पद पर रह चुके हैं। इनकी नियुक्ति से साफ है कि लंबे समय से लंबित बड़ी रैपिड रेल कॉरीडोर योजनाओं को अब रफ्तार मिलेगी।
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एनसीआरटीसी का मकसद एनसीआर शहरों के बीच बेहतर कनेक्टविटी देना और रैपिड रेल कॉरिडोर बनाना है। ताकि, परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ बड़े वाहनों को शहरों के बीच से गुजरने के बजाए बाहर-बाहर निकाला जा सके।
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इन कॉरिडोर का है जिम्मा
दिल्ली कटरा एक्सप्रेस-वे
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने दिल्ली और एनसीआर शहरों के बीच लोगों को बेहतर आवागमन के लिए आठ कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम कर रही है।
इसमें एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में तीन को मंजूरी मिल चुकी है।
इन कॉरिडोर का है जिम्मा
दिल्ली-गुड़गांव-रेवाड़ी-अलवर, दिल्ली-सोनीपत-पानीपत और दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर को मंजूरी मिली है। इस योजना को जमीन
पर उतारने का जिम्मा एनसीआरटीसी के पास है।
इस परियोजना पर कुल 72,170 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अब स्थायी प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह की नियुक्ति के बाद इन योजनाओं पर
तेजी से काम होने की उम्मीद है।
इसमें एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में तीन को मंजूरी मिल चुकी है।
इन कॉरिडोर का है जिम्मा
दिल्ली-गुड़गांव-रेवाड़ी-अलवर, दिल्ली-सोनीपत-पानीपत और दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर को मंजूरी मिली है। इस योजना को जमीन
पर उतारने का जिम्मा एनसीआरटीसी के पास है।
इस परियोजना पर कुल 72,170 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अब स्थायी प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह की नियुक्ति के बाद इन योजनाओं पर
तेजी से काम होने की उम्मीद है।