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बिजली मिली तो भी तरसेगा एनसीआर
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 16 Jul 2014 01:08 AM IST
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सूबे में बिजली का सबसे ज्यादा लचर सिस्टम एनसीआर का है। यही कारण है कि शासन से 24 घंटे सप्लाई आदेश के बावजूद 10-12 घंटे की कटौती रोज हो रही है। ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्ध न होने के चलते एनसीआर को बिजली नहीं मिल पा रही है।
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सप्लाई उपलब्ध होने के बावजूद यहां तक लाने के लिए लाइन तक नहीं हैं। बिजली की उपलब्धता होने के बावजूद हालत सुधरने वाली नहीं है।
एनसीआर के लोग पावर कारपोरेशन अफसरों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। अफसरों ने यहां के लोगों की जरूरत को ध्यान में रखकर स्कीम ही तैयार नहीं की। गाजियाबाद को 1575 एमवीए बिजली की जरूरत है, जबकि सिस्टम मात्र 1150 एमवीए का है।
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इसकी जर्जर हालत के चलते करीब 980 मेगावाट बिजली ही मिल पाती है। अभी तक लोगों को फीलगुड कराते रहे कारपोरेशन अफसरों ने यह हकीकत चीफ सेक्रेट्री को भेजी रिपोर्ट में स्वीकार की है।
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एसई टेक्नीकल आरएस यादव ने बताया कि महानगर को 400 केवीए के सात, 220 केवीए के बारह, 132 केवीए के 22 और 33 केवीए के 35 पावर स्टेशनों की तत्काल जरूरत है। अभी तक केवल एक 400 केवीए पावर स्टेशन से सप्लाई दी जा रही है। ऐसे में पूरा पावर सिस्टम ओवरलोड है।
महानगर की बिजली आपूर्ति को एक और झटका
जर्जर संसाधनों के साथ ही पावर सप्लाई को एक और झटका लगा है। इंदिरापुरम में 400 केवीए के पावर स्टेशन निर्माण को अफसरों ने तीसरे चरण में धकेल दिया है। अब इसका निर्माण 2017 से शुरू किया जाएगा।
इसका फायदा लोगों को 2020 में जाकर मिलेगा। अभी तक यह पहले चरण में था, इससे 2016 तक सप्लाई मिल सकती थी। डीएम, चीफ इंजीनियर और एसई ट्रांसमिशन ने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी है। अब कैबिनेट की मीटिंग के बाद ही इसका चरण बदला जा सकता है।