{"_id":"d3264ffc47319830233ff4f49ca5c3b5","slug":"navratri-from-6-14-am-to-7-52-pm-decreases-installation-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवरात्र : सुबह 6.14 से 7.52 बजे तक करें घट स्थापना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवरात्र : सुबह 6.14 से 7.52 बजे तक करें घट स्थापना
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 24 Sep 2014 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 25 सितंबर से हो रहा है। नवरात्र में घट स्थापना या कलश स्थापना पूजन का महत्वपूर्ण अंग है। इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.14 बजे से सुबह 7.52 मिनट तक है।
विज्ञापन
यह मुहूर्त वृष लग्न में हैं और वृष लग्न के स्वामी शुक्र हैं। शुक्र को लक्ष्मी का ग्रह माना जाता है इसलिए इस शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होगी। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि इस बार नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हैं।
विज्ञापन
गुरुवार का कारक ग्रह बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में है। इससे पहले 2002 में ऐसा योग बना था जब गुरु अपनी उच्च राशि में थे। लेकिन इस बार शनि तुला राशि में उच्च के हैं।
विज्ञापन
इससे कई शुभ फल मिलेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्रों पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहे हैं।
पूजन विधि
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्र के पहले दिन घर के ईशान कोण में हरी पत्तियों से ढका घट जल भरकर स्थापित करना चाहिए। पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि मां दुर्गा की पूजा कमल के फूल, पत्तियों, फलों, हवन सामग्री, धूप और घी के दिए से करें।
दुर्गा का शाकुंभरी रूप वनस्पति की देवी का है अत: प्रतिपदा को लोग जौ जमाते हैं। अष्टमी को कन्या पूजन तथा नवमी को ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी सरस्वती की आराधना की जाती है।
नवरात्र पूजा पूर्वोत्तर दिशा कुशा के आसन पर बैठकर विधिवत पूजन आरती की जाती है। पूजन के बाद क्षमा प्रार्थना कर लेने से सभी दोषों का निवारण हो जाता है।
कैसे करें व्रत
पंडित गिरीश मिश्र ने बताया कि व्रत के दौरान अनाजों जैसे गेहूं, चावल, मक्का, जौ आदि के सेवन के बजाय फल-दूध आदि का सेवन करना चाहिए। सुबह हल्का आहार लें जिसमें भरपूर मात्रा में फल हों।
ज्यादा तले-भूने व अधिक वसायुक्त भोजन प्याज-लहसुन मसाले आदि के सेवन से बचें। सेंधा नमक में बना आहार लें और धूम्रपान और मदिरा का सेवन न करें।