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Navratri 2022: सावधानी से करें उपवास; गर्भवती, स्तनपान करवाने वाली मां को रखना होगा विशेष ध्यान
Tue, 27 Sep 2022 09:49 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 27 Sep 2022 09:49 AM IST
सार
डॉक्टरों की माने तो मधुमेह, बीपी के मरीज व गर्भवती महिलाओं को व्रत नहीं रखना चाहिए। यदि कोई करता भी है तो उन्हें थोड़े-थोड़े समय में कुछ खाते रहना चाहिए। यदि ऐसा नहीं करते तो गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है।
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नवरात्रि 2022 (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नवरात्र का पावन पर्व शुरू होने के साथ ही महिलाएं व पुरुष मां भगवती के लिए व्रत रख रही हैं। इनमें ज्यादातर लंबे समय के लिए व्रत रखते हैं। व्रत रखना शरीर के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गर्भवती महिला, स्तनपान करवा रही मां, या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को व्रत रखते समय विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
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डॉक्टरों की माने तो मधुमेह, बीपी के मरीज व गर्भवती महिलाओं को व्रत नहीं रखना चाहिए। यदि कोई करता भी है तो उन्हें थोड़े-थोड़े समय में कुछ खाते रहना चाहिए। यदि ऐसा नहीं करते तो गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है। पेट में उसके घूमने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। वहीं महिलाओं खून का बहाव बढ़ सकता है जो खतरनाक है।
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सफदरजंग अस्पताल में प्रसूति व स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. दिव्या ने कहा कि स्तनपान करवा रही महिलाओं को अपने साथ बच्चे के पोषण का ध्यान रखना होता है। ऐसे में लंबे समय तक व्रत रखना उचित नहीं। ऐसी महिलाओं को तरल पदार्थ, फलाहार, पौष्टिक सब्जी समय-समय पर लेते रहना चाहिए। खाने के साथ मूंगफली व प्रोटिन युक्त आहार लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं को मधुमेह व उच्च रक्तचाप की समस्या है। उन्हें व्रत रखते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत के कारण ऐसी महिलाओं में समस्या बढ़ सकती है।
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वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज व सफदरजंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शीबा मरवाह ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को व्रत करने से बचना चाहिए। लंबे उपवास से गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है। उसके घूमने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि यदि गर्भवती महिला उपवास करती है तो समय-समय पर कुछ खाते रहना चाहिए। यदि महिला गर्भवती के साथ शुगर और बीपी की भी मरीज है तो दिक्कत और बढ़ सकती है। ऐसी महिलाएं यदि लंबा उपवास रखकर आलू या अन्य सामान खाते हैं तो अचानक शुगर का स्तर बढ़ जाता है जिससे बच्चे को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को बीपी और शुगर स्तर को कंट्रोल में रखना चाहिए।
शोधन प्रक्रिया है उपवास दिल्ली सरकार के आयुष विभाग के वरिष्ठ डॉ. नीरज त्रिपाठी ने बताया कि उपवास एक शोधन प्रक्रिया है, जिससे शरीर को काफी फायदा होता है। इससे शरीर में बन रहे खराब सेल खत्म हो जाते हैं, जो कैंसर जैसे रोग को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, उपवास सहित तरीके से करना चाहिए। इस दौरान कुट्टू -सिंघाड़े के आटे की रोटी खानी चाहिए, तले हुए खाने से बचना चाहिए। उपवास करने वाले ऋतु अनुसार फलाहार कर सकते हैं। इसके अलावा दही में खीरा, लौकी, मखाने व अन्य ड्रायफूड ले सकते हैँ। उन्होंने कहा कि इस दौरान सिंघाड़े के आटे का ज्यादा सेवन करने व अन्य कारणों से कब्ज की समस्या बन जाती है। ऐसी समस्याओं से बचने के लिए दूध की जगह दही का प्रयोग करना चाहिए।