'LG का केजरीवाल से सलाह लेना जरूरी नहीं है'
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राजधानी में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच जारी अधिकारों की जंग में केंद्र सरकार ने नजीब जंग का समर्थन किया है। केंद्र ने साफ किया कि नियुक्ति जैसे मामलों में उपराज्यपाल का मुख्यमंत्री से परामर्श लेना जरूरी नहीं है।
गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार देर रात अधिसूचना जारी कर साफ कर दिया है कि दिल्ली सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले संबंधी आखिरी फैसला लेने का अधिकार उप राज्यपाल के पास होगा।
केंद्र ने इस मामले में मुख्यमंत्री की इच्छा या सलाह को जरूरी नहीं बताया है। अधिसूचना के मुताबिक, अगर उपराज्यपाल चाहें तो ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री से सलाह ले सकते हैं।
केंद्र को उम्मीद है कि इस साफगोई से दिल्ली की कार्यवाहक मुख्य सचिव शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच चल रही तीखी तकरार थम जाएगी।
गजट से गर्म हुई सियासत
हालांकि केजरीवाल के तेवर देखते हुए तकरार बढ़ने के आसार ज्यादा दिख रहे हैं। इतना ही नहीं इस गजट नोटिफिकेशन में दिल्ली सरकार के अधीन काम करने वाली भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र को घटाने के 23 जुलाई 2014 के फैसले को भी बरकरार रखा गया है।
अधिसूचना के मुताबिक, एसीबी केंद्र सरकार के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह अधिसूचना संविधान की धारा 239एए के आधार पर जारी की गई है।
मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि इस अधिसूचना में कोई नई बात नहीं है। पहले भी दिल्ली की लोक व्यवस्था, पुलिस, भूमि और सेवा के मामले में अंतिम फैसला लेने का अधिकारी उप राज्यपाल के पास ही था।
लेकिन अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को उलझा कर पूरी तरह राजनीतिक बना दिया है। सूत्रों ने बताया कि इस तकरार पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को इस बाबत पूरी जानकारी दे दी है। इस अधिसूचना पर राष्ट्रपति की भी हामी है।