पलट जाएंगे दिल्ली के इन 3 सीटों के समीकरण!
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जातीय आधार पर मतदान होना लोकतंत्र के महाकुंभ यानि चुनाव का बड़ा नासूर बना हुआ है लेकिन विडंबना यह है कि ले देकर राजनेताओं के पास आखिर में यही हथियार सटीक निशाना लगाने का जरिया बनता है।
शाही इमाम के सोनिया से गुफ्तगू के बाद कांग्रेस को वोट करने की अपील, भाजपा नेता अमित शाह का मुजफ्फरनगर में बयान व बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने के पूर्व नियोजित प्लान का स्टिंग आने के बाद दिल्ली में मुस्लिम वोटरों के बीच सरगर्मी बढ़ गई है।
दिल्ली की सात सीटों में से चांदनी चौक उत्तर, पूर्वी दिल्ली व पूर्वी दिल्ली में एकतरफा जाने पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
दिल्ली में 12 फीसदी हैं मुस्लिम वोटर
राजधानी में तीन माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण देखने को मिला था लेकिन मात्र आठ सीटें लेकर अब तक सबसे बुरी तरह हारी कांग्रेस को इनमें से अधिकांश मुस्लिम बाहुल सीटों पर ही राहत मिली और उसके खाते में नौ सीटें आई।
इस विधानसभा चुनाव में आप को 28 सीटें मिली थी, जाहिर है कि भाजपा व कांग्रेस के बीच पहली बार मैदान में आई आप को मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण का लाभ हुआ। राजधानी में उत्तर पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली व चांदनी चौक लोकसभा सीटें ऐसी हैं जिसपर मुस्लिम खासी तादात में हैं, जबकि सातों लोकसभा सीटों का औसत देखें तो करीब 12 फीसदी मुस्लिम वोटर होते हैं।
इन लोकसभा क्षेत्रों की 10 विधानसभा सीटों पर तो मुस्लिम पूरी तरह से निर्णायक स्थिति में हैं। जिनमें ओखला, सीलमपुर, बाबरपुर, किराड़ी, चांदनी चौक, बल्लीमारन, मटियामहल, सदर बाजार, जंगपुरा, सीमापुरी, मुस्तफाबाद के प्रमुख इलाके शामिल हैं।
धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार का चयन करेगा मुस्लिम
शाही इमाम, अमित शाह के बयान व बाबरी मस्जिद का स्टिंग आने के बाद वैसे भी दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट किसको लेकर बहस चर्चा तेज हो गई है। जामा मस्जिद के बाहर चाय की दुकान पर जुटे लोगों में से इकबाल ने बताया कि चुनाव आने पर राजनैतिक दलों को मुस्लिमों की याद आने लगती है। मौजूदा माहौल में मुस्लिम का अपने हक में सोच समझकर एकमत से वोट देना जरूरी भी हो जाता है। किसको वोट दूंगा यह नहीं बताऊंगा।
फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम कहते हैं जहां तक मुस्लिम वोटरों का सवाल है, वह सांप्रदायिकता की प्रतीक बन चुकी भाजपा को तो वोट देता नहीं दिख रहा। इसके बाद किसी भी दल के धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार को वह अपना वोट देगा, संभव है वह उनकी नजर में भाजपा को हराने वाला जिताऊ उम्मीदवार भी हो।
जहां तक कांग्रेस को वोट देने की अपील का सवाल है तो बता दूं कि पढ़ लिख गए और मीडिया में चल रही खबरों को देखकर भला बुरा सोचने वाले युवा मुस्लिम मतदाताओं पर अब किसी की भी अपील का असर नहीं पड़ने वाला।
दिल्ली में कहां कितने प्रतिशत हैं मुस्लिम?
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किस सीट पर मुस्लिमों की क्या है स्थिति |
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उत्तर पूर्वी दिल्ली |
21.39 |
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पूर्वी दिल्ली |
15.07 |
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चांदनी चौक |
13.5 |
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उत्तर पश्चिम दिल्ली |
9 |
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पश्चिम दिल्ली |
5.59 |
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दक्षिण दिल्ली |
6 |
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नई दिल्ली |
2.4 |