{"_id":"5ff258499412e40c6d523ec3","slug":"muradnagar-crematorium-accident-news-24-lives-become-silent-keeping-two-minutes-silent","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुरादनगर हादसाः दो मिनट का मौन रख ‘मौन’ हो गईं 24 जिंदगियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुरादनगर हादसाः दो मिनट का मौन रख ‘मौन’ हो गईं 24 जिंदगियां
Mon, 04 Jan 2021 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 04 Jan 2021 05:20 AM IST
सार
- अंतिम संस्कार के बाद गलियारे में दो मिनट के मौन के लिए जमा हुए थे लोग
- पांच मिनट और न गिरती छत तो बच जाती जान
विज्ञापन
बचाव की जद्दोजहद...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मुरादनगर के बंबा रोड श्मशान घाट में मौत शायद लोगों का इंतजार कर रही थी। अंतिम संस्कार के बाद लोग गलियारे में एक स्थान पर दो मिनट के मौन और शांति पाठ के लिए एकत्र हुए तो अचानक 15 दिन पहले बनी छत भरभरा कर गिर गई। इस छत के नीचे मृतक के परिजन, सगे-संबंधियों और अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों में से 24 की जान चली गई, जबकि 15 अभी भी जिंदगी और मौत के बीच ‘जंग’ लड़ रहे हैं। पांच मिनट और छत न गिरती तो 24 लोगों की जान बच जाती।
विज्ञापन
फल विक्रेता जयराम के अंतिम संस्कार में शामिल अधिकांश लोग क्रिया के दौरान चिता के आसपास ही थे। चिता तैयार करने से लेकर मुखाग्नि देने की प्रक्रिया में करीब पौन घंटा लगा। इसके बाद लोगों के वापस जाने से पहले दो मिनट का मौन और शांति पाठ करने के लिए लोग गलियारे में एकत्र हुए। आमतौर पर यह प्रक्रिया भी चिता के पास ही संपन्न हो जाती है, लेकिन बारिश होने की वजह से लोग गलियारे में इकट्ठा हो गए थे। दो मिनट का मौन रखने के बाद शांति पाठ किया गया और अस्थियां चुनने का समय तय किया जा रहा था।
विज्ञापन
इसके बाद लोग घरों को लौटने ही वाले थे कि इससे पहले ही छत भरभरा कर गिर गई और पलक झपकते ही लोग मलबे के नीचे दब गए। गलियारे के बाहरी हिस्से पर खड़े लोग तो बच गए, लेकिन बीच में खड़े लोगों को बचने का मौका भी न मिल पाया। मलबे के नीचे से निकालकर स्थानीय लोगों, पुलिस और एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम ने उन्हें निकालकर अस्पताल भेजा, लेकिन 23 लोगों की जान चली गई।
विज्ञापन