{"_id":"58b442ab4f1c1b965e830949","slug":"mukhtar-ansari-not-to-campaign-parole","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को चुनाव प्रचार के लिए पैरोल नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को चुनाव प्रचार के लिए पैरोल नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Feb 2017 08:50 PM IST
विज्ञापन
mukhtar ansari
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को अपने चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए पैरोल प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि अंसारी का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनावों के ध्यानार्थ उसे प्रचार के लिए पैरोल प्रदान करना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने चुनाव आयोग के आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि अंसारी चुनाव लड़ने का अधिकारी है लेकिन इस तर्क वह चुनाव प्रचार करने का दावा करने का अधिकारी नहीं है।
विज्ञापन
अदालत ने चुनाव आयोग व सीबीआई के उस तर्क पर सहमति जताई है कि अंसारी का लंबा आपराधिक रिकार्ड रहा है और वह संगठित अपराधों में लिप्त रहा है।
विज्ञापन
इजाजत देने पर गवाह को कर सकते हैं प्रभावित
mukhtar ansari
- फोटो : bbc
इसके अलावा अदालत ने इस बात पर भी सहमति जताई है कि यदि अंसारी को हिरासत में चुनाव प्रचार करने की इजाजत दी गई तो वह अपने पर चल रहे मुकदमों के गवाहों को प्रभावित कर सकता है और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हो पाएंगे।
न्यायमूर्ति ने अंसारी को निचली अदालत द्वारा प्रचार के लिए कस्टडी पैरोल संबंधी फैसले को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि अदालत को किसी भी अपराधी को शार्ट टर्म के लिए कहीं स्थानांतरित करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
अदालत मात्र परिवार में मृत्यु, अस्पताल या फिर बच्चे के विवाह के लिए ही ऐसा आदेश दे सकती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है लेकिन अदालत को ही यह अधिकार है कि प्रचार के लिए उसे रिहा किया जाए या नहीं।
ऐसे में वे निचली अदालत के फैसले को रद्द कर चुनाव आयोग द्वारा पैरोल को चुनौती याचिका को स्वीकार करती है। निचली अदालत ने अंसारी को 4 मार्च तक चुनाव में प्रचार करने के लिए कस्टडी पैरोल प्रदान की थी। पूर्व विधायक अंसारी हाल ही में बसपा में शामिल हुए हैं और मऊ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं।
न्यायमूर्ति ने अंसारी को निचली अदालत द्वारा प्रचार के लिए कस्टडी पैरोल संबंधी फैसले को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि अदालत को किसी भी अपराधी को शार्ट टर्म के लिए कहीं स्थानांतरित करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
अदालत मात्र परिवार में मृत्यु, अस्पताल या फिर बच्चे के विवाह के लिए ही ऐसा आदेश दे सकती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है लेकिन अदालत को ही यह अधिकार है कि प्रचार के लिए उसे रिहा किया जाए या नहीं।
ऐसे में वे निचली अदालत के फैसले को रद्द कर चुनाव आयोग द्वारा पैरोल को चुनौती याचिका को स्वीकार करती है। निचली अदालत ने अंसारी को 4 मार्च तक चुनाव में प्रचार करने के लिए कस्टडी पैरोल प्रदान की थी। पूर्व विधायक अंसारी हाल ही में बसपा में शामिल हुए हैं और मऊ विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं।