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पैरोल के बाद भी जेल से क्यों नहीं निकल रहे मुख्तार?

Tue, 06 May 2014 09:27 AM IST
Updated Tue, 06 May 2014 09:27 AM IST
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Mukhtar Ansari have custody parole for election campaign, but...

अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा और आरके ठाकुर ने कहा कि मुख्तार अंसारी घोसी लोकसभा सीट से कौमी एकता दल के उम्मीदवार हैं। यहां 12 मई को मतदान होना है।

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राजधानी की दो अदालतों से दस दिन की कस्टडी पैरोल मिलने के बावजूद मुख्तार अंसारी को आगरा सेंट्रल जेल प्रशासन ने धोखाधड़ी और राजनीतिक कारणों से नहीं छोड़ा। यह उनके मुवक्किल के अधिकारों का हनन है।
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इस पर अदालत ने कहा कि जो आदेश पारित किया गया था, उस पर पूरी तरह अमल होना चाहिए था। किसी भी सूरत में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी के अधिकारों का हनन न हो, यह सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

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मुख्य सचिव, जेल अधीक्षक और एसएसपी को नोटिस

Mukhtar Ansari have custody parole for election campaign, but...

चुनाव प्रचार के लिए कस्टडी पैरोल मिलने के बाद भी मुख्तार अंसारी को जेल से न छोड़ना यूपी सरकार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और आगरा जेल अधिकारियों को भारी पड़ सकता है।

अदालत ने अवमानना के मद्देनजर यूपी सरकार के मुख्य सचिव, एसएसपी आगरा, आगरा जेल अधीक्षक और एसएसपी मऊ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जेल प्रशासन ने पुलिस उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए अंसारी को नहीं छोड़ा था।

तीस हजारी स्थित विशेष जज अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने मुख्तार अंसारी के आवेदन पर सुनवाई के बाद इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अंसारी की ओर से दायर आवेदन में जेल अधिकारियों और यूपी सरकार पर उनके अधिकार के हनन और अदालत की अवमानना का आरोप लगाया गया है।

क्या कोई बड़ी साजिश है इसके पीछे?

Mukhtar Ansari have custody parole for election campaign, but...

संविधान का अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में आरोपी को सुरक्षा प्रदान करता है और आरोपी की हिरासत अदालती निर्देश के मुताबिक ही होनी चाहिए। गौरतलब है कि अदालत ने चुनाव प्रचार के लिए मुख्तार अंसारी को तीन से दस मई तक के लिए कस्टडी पैरोल प्रदान की थी।

इस दौरान अंसारी को सीबीआई कस्टडी में रखने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद आगरा जेल के अधिकारियों ने अंसारी को नहीं छोड़ा था।

इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने तीस अप्रैल को मुख्तार अंसारी को दस दिन की कस्टडी पैरोल दी थी। तब भी आगरा जेल प्रशासन ने पुलिस बल न होने का हवाला देते हुए मुख्तार अंसारी को नहीं छोड़ा था।

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