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जेवर एयरपोर्ट पर बनेगा एमआरओ सेंटर
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 25 Jun 2017 11:01 PM IST
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जेवर एयरपोर्ट
- फोटो : SELF
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जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट से सिर्फ यात्री ही नहीं ढोए जाएंगे, बल्कि एक और अहम काम होगा। यहां विमान का एमआरओ (मेनटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहालिंग) सेंटर भी बनेगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले विमान यहां रिपेयर हो सकें।
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दरअसल, देश में एमआरओ सेंटर नागपुर में बना हुआ है। मुंबई एयरपोर्ट तक आने वाले विमान तो वहां जाकर दुरुस्त हो जाते हैं, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले विमान को नागपुर सेंटर ले जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए मेनटनेंस, रिपेयर ओवरहालिंग के लिए एयरक्रॉफ्ट जिस देश की उड़ान भर रहे होते हैं वहीं पर करवा लेते हैं। इससे देश की आमदनी का बड़ा जरिया विदेश चला जाता है। श्रीलंका, भूटान आदि देशों का चक्कर लगाने वाले विमान वहीं ठीक होकर आते हैं।
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इसलिए जेवर एयरपोर्ट पर इसे भी शामिल करते हुए निर्माण होगा। विदेश जाकर रिपेयर कराने वाले विमान यहीं दुरुस्त हो सकेंगे। इससे बचत के साथ ही देश भर में मेनटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहालिंग इंडस्ट्री को गति मिलेगी। साथ ही विदेश से आने वाले विमानों के एमआरओ से भी आमदनी होगी। एमआरओ इंडस्ट्री में अपना देश बहुत पीछे है। जानकार बताते हैं कि दुनिया भर में एमआरओ इंडस्ट्री का कारोबार करीब 48 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें भारत का योगदान सिर्फ एक प्रतिशत है। इस आंकड़े से एमआरओ इंडस्ट्री की स्थिति का आकलन सहज है।
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पीपीपी मॉडल से प्रस्तावित एयरपोर्ट के पास एमआरओ सेंटर बनने से हजारों युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा। यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है। बता दें, कि एलएस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने जेवर में एयरपोर्ट को हरी झंडी दे दी है।
अब एयरपोर्ट मेट्रो पकड़ेगी रफ्तार
दरअसल, परी चौक से एयरपोर्ट की प्रस्तावित जगह तक मेट्रो ले जाने की योजना है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी बन गई है। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे के पैरलल ग्रीन बेल्ट के साथ मेट्रो प्रस्तावित किया है। परी चौक से प्रस्तावित एयरपोर्ट तक की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। यात्रियों की संख्या कम होने से फिलहाल इसे टाल दिया गया था, लेकिन अब इसे बनवाना जरूरी हो गया है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो परी चौक होकर गुजर रही है। इस रूट के बन जाने से दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यात्रियों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
नाइट सफारी को भी लगेंगे पंख
ग्रेटर नोएडा के जीबीयू के पास करीब 338 एकड़ में नाइट सफारी प्रस्तावित है। इसकी जरूरत न होने की बात कहकर इस पर रोक लगा दी गई है। अब एयरपोर्ट प्रस्तावित होने से इसके भी बन जाने की संभावना है। करीब 1000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को भी पीपीपी मॉडल पर बनाने की योजना बनी थी। इससे यह एयरपोर्ट सामरिक व व्यापारिक नजरिए के साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी बेहतर साबित होगा।